मुकद्दस सफर हज के अंतिम दिन बुधवार को नारे तकबीर की गूंज के साथ आखिरी जत्था रवाना हुआ। अल्लाहु अकबर, लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक के नारों संग अंतिम जत्थे को हज हाउस से रवाना किया गया।
हजयात्रियों के अंतिम जत्थे में मंगलवार को छूटे हुए 48 हजयात्रियों समेत 261 हजयात्री रवाना हुए। बता दें कि मंगलवार को कम सीटों वाली फ्लाइट आने की वजह से 202 हजयात्री यहां से मदीना के लिए रवाना हुए थे। बीते पंद्रह दिनों में वाराणसी इंबार्केशन से सोलह जिलों के कुल 4118 हज यात्रियों ने काबा के लिए उड़ान भरी।
बुधवार को हज हाउस में कुछ खास ही रौनक थी, हालांकि अंतिम दिन होने की वजह से सारी व्यवस्थाएं धराशाई हो गईं। सिक्योरिटी हॉल तक परिवार वाले अपने जाइरीन संग पहुंच गए थे, लेकिन उन्हेें मना करने वाला कोई नहीं था। इसके अलावा हजयात्रियों की रवानगी का सिलसिला भी देरी से शुरू हुआ।
बुधवार को हजयात्रियों के आखिरी जत्थे में डेढ़ साल का गुलाम मोहम्मद भी शामिल रहा। लोहता के रहने वाले बुनकर मोहम्मद कलाम और उनकी बीवी खुर्शीद बेगम के साथ उनका डेढ़ साल का बेटा भी सफरे हज पर गया। इसी तरह इस जत्थे में भदोही की पीएचडी स्कॉलर रजिया बानो (25) भी अपनी अम्मी अनवरी बेगम और अब्बू शेख हबीबुल्लाह के साथ सफरे हज पर रवाना हुईं।
रजिया अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से भूगोल विषय में पीएचडी कर रही हैं। उनका कहना है कि अल्लाह के दरबार में उन्हें जाने का मौका मिला, वो बहुत खुशकिस्मत हैं। ऐसे ही इलाहाबाद के अब्दुल रमजान अपने अब्बू अब्दुल जब्बार के साथ सफरे हज पर रवाना हुए।