वाराणसी। करसड़ा प्लांट के संबंध में एटूजेड, नगर निगम और राज्य सरकार के बीच जो भी विवाद है उसे सुलझाया जाए। जरूरत पड़ी तो केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय भी हस्तक्षेप करेगा।
जब तक प्लांट चालू नहीं हो जाता तब तक एटूजेड से विवाद का हवाला देकर आम जनता को परेशानी में नहीं डाला जा सकता। नगर निगम करसड़ा प्लांट की कूड़ा गाडि़यों और संसाधनों का इस्तेमाल करे और डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन कराया जाए।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के सचिव प्रवीण प्रकाश ने बुधवार को ये निर्देश नगर आयुक्त उमाकांत त्रिपाठी को दिए।
अपने वाराणसी दौरे के दूसरे दिन करसड़ा प्लांट पहुंचे केंद्रीय सचिव ने शहर के कचरा प्रबंधन के अलावा वाटर-सीवरेज ट्रीटमेंट मैनेजमेंट की जानकारी ली।
नगर आयुक्त को ताकीद किया कि करसड़ा प्लांट को लेकर एटूजेड से विवाद का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारियाें से पीछा नहीं छुड़ाया जा सकता। दरअसल, करसड़ा प्लांट परिसर में केंद्रीय सचिव पहुंचे तो वहां दर्जनों कूड़ा गाडि़यां खड़ी दिखीं।
इनका उपयोग पूछा तो नगर आयुक्त ने एटूजेड से विवाद का हवाला देते हुए बताया कि कुछ वाहनों का उपयोग होता है बाकी यहीं खड़े हैं।
इस पर केंद्रीय सचिव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि, जब कुछ वाहन का उपयोग हो सकता है तो बाकी का क्यों नहीं। साथ ही शनिवार को शहरी विकास मंत्रालय में आयोजित बैठक में इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार करके लाइए।
केंद्र सरकार काशी की कचरा प्रबंधन की समस्या सुलझाने के लिए आर्थिक, तकनीकी हर मदद देने को तैयार है। करसड़ा के बाद उन्होंने रमना स्थित अस्थाई कूड़ा डंपिंग ग्राउंड, बरईपुर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और गोइठहां स्थित प्रस्तावित एसटीपी का निरीक्षण कर वहां के तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली।