एसएलडी की मजबूत पकड़ के लिए टाटा मोटर्स के इंजीनियरों का एक दल जल्द ही कार्यशाला पहुंचकर एसएलडी की तकनीकी जांच पड़ताल करते हुए उस पर कोडिंग करेगा। जांच में पता चला कि चालक तेजी से फेरा बढ़ाने के चक्कर में एसएलडी तोड़ रहे हैं। बसों की स्पीड तय है कि 70 से अधिक नहीं होगी लेकिन चालक 80 किमी के पार बसों को चला रहे हैं।
कैंट, ग्रामीण डिपो के अलावा गाजीपुर, सोनभद्र, विंध्यनगर डिपो से भी ऐसी शिकायतें आ रही हैं। अमर उजाला ने 23 नवंबर के अंक में 31 रोडवेज बसों के यात्रियों की 77 बार खतरे में डाली जान शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। पिछले दिनों आयोजित वीडियो कांफ्रेंसिंग में एमडी राजशेखर ने नाराजगी जाहिर करते हुए एसएलडी का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकेत भी क्षेत्रीय प्रबंधक को दिया।
चालकों ने ढूंढ निकाला काट
बस के इंजन में लगे पंप और फिल्टर के बीच स्पीड लिमिट डिवाइस लगाई गई है। इस डिवाइस से होकर निर्धारित मात्रा में ही फ्यूल इंजन में पहुंचता है। मगर, चालकों ने इसका काट ढूंढ़ निकाला। एसएलडी को तोड़ते हुए बस 80 के ऊपर बस दौड़ा रहे हैं।
कर्मचारियों की सांठगांठ से टूट रहा एसएलडी
कार्यशाला में गाड़ियों के फिटनेस की जांच होती है। इस दौरान स्पीड लिमिट डिवाइस की जांच होती है। इसके लिए डिवाइस पर कोडिंग भी की गई है। बावजूद, कुछ कर्मियों की आपसी सांठगांठ से एसएलडी तोड़ दिया जा रहा है।
वाराणसी परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक केके शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान पकड़ में आया कि चालक एलएलडी का पालन नहीं कर रहे हैं। जिन पर कार्रवाई के लिए संबंधित डिपो के एआरएम को पत्र लिखा जा रहा है तो कुछ पर कार्यवाई की भी गई है। वहीं टाटा कंपनी के इंजीनियरों से भी संपर्क साधा गया है। ताकि एसएलडी से छेड़छाड़ न किया जा सके।