राजघाट पुल पर हादसे के बाद रामनगर में इस कदर जाम लगा कि लाख कोशिश के बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच पा रही थी। जब और कोई रास्ता न सूझा तो अंततः घायलों को विक्रम, डीसीएम, महिंद्रा पिकअप आदि वाहनों से से सभी को ले आया गया। बाद में मृतकों को इन्ही वाहनों से पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। लगभग दो घंटे बाद चार से पांच एंबुलेंस अस्पताल में पहुंचीं।
जय गुरुदेव के अनुयायियों की भीड़ में भगदड़ के बाद अचानक लोग राजघाट पुल से शहर की ओर घूम गए। कुछ लोग पड़ाव से रामगनर की ओर निकल गए। भीड़ बढ़ने और पड़ाव मार्ग पर वाहनों का आवागमन ठप होने से पूरे शहर में भीड़ का दबाव बढ़ा और जाम लग गया। सड़क से लेकर गलियां तक वाहनों से पट गईं। प्रमुख चौराहों और गलियों से निकलना मुश्किल हो गया। राजघाट पुल पर रात करीब दस बजे वाहनों का आवागमन चालू किया गया। करीब आठ घटे पुल पर आवागमन बंद हो गया।
राजघाट पुल पर हुए हादसे के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने चौकाघाट लकड़ी मंडी से वाहनों को पड़ाव की ओर जाने से रोक दिया। अचानक यातायात बंद होने से चौकाघाट लकड़ी मंडी से लेकर अंधरापुल, रोडवेज, कैंट स्टेशन, लहरतारा से चांदपुर चौराहे तक वाहनों की लंबी कतार लग गई।
अंधरापुल पर जाम लगने से नदेसर से मिंट हाउस तक जाम लग गया। तेलियाबाग, जगतगंज, लहुराबीर, मलदहिया और हुकुलगंज मार्ग, पांडेयपुर तक पूरा शहर पैक हो गया। रामनगर, पड़ाव की तरफ भी जाम लग गया। कैंटोनमेंट से बौलिया वाले रास्ते पर भी वाहनों की लंबी कतार लग गई। जल्दी निकलने के चक्कर में लोगों ने गलियों की ओर रुख किया तो गलियां भी पैक हो गईं।