मौत की अफवाह, लंका से अस्सी तक पिटवाई डुगडुगी
धर्मेंद्र राय के मुताबिक एक बार डॉ. रामजी राय अपने गांव चले गए थे तो साथियों ने खुराफात सोची और उनकी मौत की अफवाह उड़ा दी। काशीनाथ ने कहा- सब काहे मुंह लटकाए हो। तुम लोग इतना उदास क्यों हो। फिर किसी ने कहा कि रामजी नहीं रहे। फिर नारायण हाता में तेरहवीं की योजना बनी।
लंका से अस्सी तक डुगडुगी पिटवा दी गई कि सुनो, सुनो दुनिया छोड़ गए। चाहने वाले इसे सच समझ अस्सी जुटने लगे और बड़ा बखेड़ा हुआ। लेकिन आज वह डुगडुगी सच साबित हुई। अस्सी के डॉ. रामजी राय दुनिया छोड़ गए।