यूपी के बलिया में चल रहे ददरी मेले में शनिवार की शाम मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी ने खूब रंग जमाया। अपनी शेरो शायरी से उन्होंने बूढों को भी जवानी का अहसास कराया। 'मेरे हुजरे में नहीं कहीं और रख दो/ आसमां लाए हो/ लाओ जमीं पर रख दो/, अब कहां ढूंढने जाओगे हमारे कातिल/ आप कत्ल का इल्जाम हमीं पे रख दो...। से जब डॉ. राहत इंदौरी ने शुरुआत की तो श्रोता झूम उठे।
ददरी मेला के भारतेंदु कला मंच पर नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित मुशायरे में राहत इंदौरी के साथ देश के मशहूर शायरों ने ऐसा समा बांधा कि पंडाल में मौजूद लोगों ने पूरी रात शायरी का आनंद लिया। आज की शाम कुमार विश्वास की प्रस्तुति होगी। ‘अंगारों को फूल बनाया जाएगा, ये नारा मकबूल बनाया जाएगा। बाद में होगी मंदिर-मस्जिद की तामीर, सबसे पहले स्कूल बनाया जाएगा।’ म
शहूर शायर राहत इंदौरी ने अपने इस कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुशायरे की शुरुआत समीर गाजीपुरी की शायरी से हुई, उन्होंने कहा- ‘दिल से तकंचुर और तअस्सुब निकाल दे, इंसानियत अजीम है इंसान बनके देख।’
शायरों द्वारा कार्यक्रम में यूं तो कई नगमे सुनाए गए, किंतु जब महिला शायर मुमताज नसीम की शायरी ‘तुझे इसकी कोई खबर नहीं, ये तेरे सकून की बात है। मेरी जिंदगी का सवाल है, तेरे एक फोन की बात है।’