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UP: नारी शक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण से लोकतंत्र में नए युग की शुरूआत, लेखिका डॉ नीरजा ने कही ये बात

Tue, 14 Apr 2026 11:06 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: डॉ. नीरजा माधव ने कहा कि नारी शक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण लोकतंत्र में नए युग की शुरूआत होगी। साहित्यकार, शिक्षाविद, डॉक्टर और प्रोफेशनल ने महिला आरक्षण कानून को ऐतिहासिक बताया। 
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साहित्यकार, शिक्षाविद, डॉक्टर और प्रोफेशनल ने महिला आरक्षण कानून को ऐतिहासिक बताया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साहित्यकार एवं लेखिका डॉ नीरजा माधव ने कहा कि नारी शक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण लोकतंत्र में नए युग की शुरूआत होगी। 2023 में महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम को मंजूरी मिली थी। 16, 17 और 18 अप्रैल को प्रस्तावित संसद के विशेष सत्र में इसे पारित किया जाएगा। 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को आरक्षण मिलने लगेगा।

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डॉ नीरजा माधव रविवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात कर रही थीं। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की 33 प्रतिशत भागीदारी ऐतिहासिक रहेगी। महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। वह अपने अधिकारों को और मजबूती प्रदान करेंगी। भारत ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहां नारी शक्ति एक विचार नहीं बल्कि शासन और लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति बनने जा रही हैं। आधी आबादी को पूरा अधिकार मिलने जा रहा है। 

नारी समाज की आधारशिला है। प्राचीन ग्रंथों और वैदिक परंपराओं में महिलाओं को पुरुषों जैसा स्थान दिया गया है। ऋषियों के साथ ऋषिकाओं का योगदान महत्वपूर्ण बताया गया गया है। इसके बावजूद राजनीति में महिलाओं की भागीदारी उनकी जनसंख्या के अनुपात में कभी नहीं रही।
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निवेदिता शिक्षा सदन की प्रधानाचार्य डॉ आनंद प्रभा ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में मान्यता है कि दस पुत्रों के समान एक कन्या होती है। नारी वंदन अधिनियम इसे स्थापित करेगा। लोकसभा और विधानसभा का प्रतिनिधत्व पाकर महिलाएं और सशक्त बनेंगी। डॉ शिप्रा श्रीवास्तव (धर) ने कहा कि नेतृत्व के लिए महिलाएं आगे आएंगी तो समाज व राष्ट्र को निश्चित ही लाभ मिलेगा। सीए रश्मि केशरवानी ने कहा कि संसद में जब महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो उसका रिजल्ट भी ज्यादा अच्छा निकलेगा। 

समाजसेवी डॉ रचना अग्रवाल ने कहा कि सरकार की कई योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी और स्वामित्व को प्राथमिकता दी गई है जो सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है। साधना वेदांती ने कहा कि भारत का इतिहास महिलाओं के साहस और नेतृत्व से भरा रहा है। रानी लक्ष्मीबाई और दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने न केवल अपने राज्य की रक्षा की, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता को भी बचाए रखा।

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