ज्योतिष शास्त्र में भाल रेखा को महत्वपूर्ण माना जाता है। भाल रेखा या माथे की रेखाएं व्यक्ति के जीवन, भूत, वर्तमान और भविष्य के बारे में जानकारी देती है। ये रेखाएं व्यक्ति के मस्तिष्क की स्थिति, आकार, रंग और रेखाओं के अध्ययन से फलादेश करती हैं। बुद्धि और सोच-विचार की क्षमता भी इस पर निर्भर है। अतः ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत भाल रेखा का अध्ययन अति महत्वपूर्ण माना जाता है।
उक्त बातें काशी विद्वत परिषद के मंत्री व राष्ट्रपति पुरस्कृत पूर्व प्राचार्य डॉ. गणेश दत्त शास्त्री ने शनिवार को दशाश्वमेध के अति प्राचीन शास्त्रार्थ महाविद्यालय में ज्योतिष ज्ञान शिविर के शुभारंभ पर कहीं। भाल रेखाओं के अध्ययन से व्यक्ति को अपने जीवन के बारे में बेहतर तरीके से समझने और मार्गदर्शन करने में मदद मिलती है।
संचालक ज्योतिर्विद आचार्य संजय उपाध्याय ने कहा कि लंबी और स्पष्ट मस्तक रेखा व्यक्ति के बुद्धिमान और तर्कशील होने का संकेत देती है। छोटी रेखा कम बुद्धि,कम धैर्य और रचनात्मकता की कमी का संकेत दे सकती है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. पवन कुमार शुक्ल ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र के संक्षिप्त ज्ञानार्जन हेतु छात्रहित में इस प्रकार के शिविर महाविद्यालय में निरंतर लगाए जा रहे हैं। प्रथम दिन 40 लोगों ने पंजीकरण कराया है। अध्यक्षता काशी पंडित सभा के मंत्री डॉ. विनोद राव पाठक ने किया। विशिष्ट अतिथि पूर्व चिकित्साधिकारी डॉ. सारनाथ पांडेय रहे।