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Varanasi News: पहले हुई डिलीवरी, फिर सर्जरी, डॉक्टरों ने बचाई नवजात और मां की जान

Fri, 26 Jan 2024 03:43 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी।

सार

बलिया की रहने वाली महिला की जान बीएचयू के डॉक्टरों की सूझबूझ से बची।
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विस्तार
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बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में सड़क दुर्घटना सहित अन्य घटनाओं में घायल मरीजों की सर्जरी होती है। हालांकि, एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनने के बाद हर कोई डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ की सराहना कर रहा है।
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28 वर्षीय एक गर्भवती महिला जिसकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। उसकी सर्जरी और डिलीवरी साथ-साथ कर डॉक्टरों ने आठ माह के बच्चे और मां की जान बचा ली। बच्चा एनआईसीयू में है, जहां चिकित्सकों की टीम उसकी निगरानी कर रही है। एक साल के अंदर ट्रॉमा सेंटर का यह दूसरा मामला है। नौ माह के नवजात और मां की जान बचाई गई थी।

बलिया के बसारिखपुर निवासी महिला प्रतिमा गौड़ (28) को चोट लग गई थी। उसकी जांघ की हड्डी टूट गई थी। परिजन उसे छह जनवरी को रात 9.25 बजे बीएचयू ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। महिला आठ माह की गर्भवती थी। डॉक्टरों ने पहले इमरजेंसी में उपचार किया, बाद में डे केयर में भर्ती किया गया। ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह ने आर्थोपेडिक्स विभाग, स्त्री रोग विभाग के साथ ही बाल रोग विभाग के चिकित्सकों से बातचीत के बाद महिला की सर्जरी का निर्णय लिया।
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12 जनवरी को तीनों विभागों के चिकित्सकों ने सर्जरी शुरू की। प्रो. सौरभ के अनुसार करीब दो घंटे तक चली सर्जरी में पहले महिला की डिलीवरी कर नवजात की जान बचाई गई। इसके बाद टूटी जांघ की सर्जरी की गई। महिला को 19 जनवरी को डिस्चार्ज किया गया है।

एनआईसीयू में है नवजात, टीम कर रही निगरानी
ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी के बाद बच्चे को आईसीयू एंबुलेंस से तुरंत एनआईसीयू में भिजवाया गया। यहां बाल रोग विभाग के प्रोफेसर अशोक चौधरी की देखरेख में बच्चे को भर्ती किया गया है। प्रो. अशोक का कहना है कि बच्चे का वजन निर्धारित मानक से कम है। एक माह तक बच्चा निगरानी में रहेगा।

इन डॉक्टरों ने निभाई अहम भूमिका
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह के निर्देशन में आर्थोपेडिक्स विभाग से डॉ. प्रशांत, डॉ. सुशित तिवारी स्त्री रोग विभाग से डाॅ. संगीता राय, डॉ. अमृता के साथ ही बाल रोग विभाग से प्रो. अशोक चौधरी ने सहयोग किया।
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