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अहमदाबाद हादसा: प्लेन क्रैश में मरे लोगों के दांतों से हुई DNA जांच, BHU के वैज्ञानिक ने दी थी सलाह; जानें खास

Sun, 22 Jun 2025 05:42 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बैठे यात्री। - फोटो : अमर उजाला
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Ahmedabad Plane Crash Death: बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने ही अहमदाबाद प्लेन क्रैश में मारे गए लोगों के दांत के सैंपल से डीएनए जांच की सलाह दी। वह अहमदाबाद गए भी थे। उनका कहना था कि यदि शवों की पहचान नहीं हो पा रही तो सैंपलिंग में दांतों का सहारा लिया जा सकता है। इससे पहचान आसान हो जाएगी। इसे भी आधार बनाकर वैज्ञानिकों की टीम ने काम किया और 1000 सैंपल का फॉरेंसिंक डीएनए टेस्ट करके 231 शव उनके परिजनों को सौंप दिए।

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एनएफएसयू गांधीनगर और एसएफएल अहमदाबाद के वैज्ञानिकों की टीम ने प्लेन क्रैश में मारे गए लोगों के डीएनए की जांच की है। प्लेन क्रैश के बाद देश भर के वैज्ञानिकों ने डीएनए टेस्ट पर अपना-अपना मत दिया।

बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने भी अहमदाबाद में वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। प्रो. चौबे ने टीम से बताया कि अचानक से लगी आग में दांतों को ज्यादा नुकसान नहीं होता है। शरीर तो, राख हो जाती है। प्रो. चौबे ने 96-96 के बैच में सैंपल कराने की सलाह दी। इस तरीके से तीन ही घंटे में 96 शवों की पहचान की जा सकती है।

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320 करोड़ संरचनाओं से बना इंसान का डीएनए
प्रो चौबे के मुताबिक फॉरेंसिक डीएनए से किसी की भी पहचान की जा सकती है। हर इंसान का डीएनए चार तरह के 320 करोड़ संरचनाओं से बना होता है। ये सभी एक सीक्वेंस में जुड़े होते हैं। इससे किसी की जेनेटिक पहचान निकाली जाती है। ये ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित गुण आनुवांशिक तौर पर आगे बढ़ता है। इसमें कुछ ऐसे म्यूटेशन होते हैं, जो किसी भी इंसान को दूसरे से अलग बनाते हैं।
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अहमदाबाद एयरपोर्ट पर गहमागहमी। - फोटो : अमर उजाला
शॉर्ट टेंडम रिपिट तकनीक का हुआ इस्तेमाल
प्रो चौबे के मुताबिक, फॉरेंसिक डीएनए इंवेस्टिगेशन में शॉर्ट टेंडम रिपिट (एसटीआर) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। एसटीआर विश्लेषण डीएनए प्रोफाइलिंग की रीढ़ है। एसटीआर डीएनए के वे छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं, जो आमतौर पर 2 से 6 संरचनाओं (जिनको न्यूक्लियोटाइड्स भी कहा जाता है) के बने होते हैं। 

ये सीक्वेंस के टुकड़े हर व्यक्ति में अलग-अलग संख्या में होते हैं। इसकी वजह से हर व्यक्ति का एक यूनिक प्रोफाइल बनाता है। माता-पिता से पहचान के लिए मिलाए जाते हैं 21-21 एलील, अहमदाबाद में भी यही पद्धति अपनाई गई

प्रो चौबे के मुताबिक, 21 एसटीआर के किट से जांच की जाती है। एक एसटीआर को फॉरेंसिक भाषा में लोकस कहते है। एसटीआर विश्लेषण में, इन्ही लोकस का अध्ययन किया जाता है। हर एक लोकस दो एलील का बना होता है, जो कि माता-पिता से मिलता है। 

एक व्यक्ति की पहचान के लिए माता-पिता के 21-21 एलील का मिलान किया जाता है। अगर माता पिता न हो, तो भाई या बहन के साथ भी 42 एलील में से 21 एलील मैच होते हैं। अहमदाबाद विमान दुर्घटना में भी यही पद्धति अपनाई गई। मृत व्यक्ति के शरीर से टिशू, दांत आदि के सैंपल लिए गए। इससे डीएनए निकाला गया और उस डीएनए के 42 एलील को पीसीआर पद्धति द्वारा शुरू किया गया।
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