शोध में आईआईटी खड़गपुर के अनुराग कादियान, इंस्टिट्यूट ऑफ वेदा दिल्ली के सरोज बाला और एंथ्रोपोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के पूर्व निदेशक प्रो. वीआर राव सहित अन्य लोग शामिल हैं। बीएचयू के डॉ. प्रज्ज्वल प्रताप सिंह, डॉ. सचिन कुमार तिवारी, सीसीएमबी हैदराबाद से प्रो. वसंत शिंदे भी शोध को आगे बढ़ा रहे हैं।
निष्कर्षों पर प्रकाशित होगी पुस्तक, सरकार को भी भेजेंगे
शोध के नतीजों पर पुस्तक प्रकाशित की जाएगी। जीन विज्ञानी प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि अब तक पांच शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसमें पहला शोध अमेरिका के पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस के पीएलओएस वन, दूसरा नेचर के साइंटिफिक रिपोर्ट्स, तीसरा यूरोपियन जर्नल ऑफ ह्यूमन जेनेटिक्स, चौथा इनसाइक्लोपीडिया ऑफ लाइफ साइंस और पांचवां मैन इन इंडिया में प्रकाशित हो चुका है। शोध कार्य के पूरा होने के बाद उसके निष्कर्षों पर प्रकाशित होने वाली पुस्तक को सरकार सहित प्रमुख शोध से जुड़ी संस्थानों को भी भेजा जाएगा, जिससे कि अधिक से अधिक लोगों को जनजातियों के इतिहास की सही जानकारी मिल सके।