आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा कि समाज में तनाव और अशांति बढ़ रही है लेकिन असहिष्णुता देश के डीएनए में नहीं है।
साहित्यकारों की हत्या निंदनीय है लेकिन पुरस्कार लौटाना मुझे सही नहीं लगता है। बुद्धिजीवियों को किसी का पक्षधर नहीं होना चाहिए। ये बातें उन्होंने रविवार को यहां सनबीम सिटी स्कूल में मीडिया से कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि अभी उनको देखा जाना चाहिए। इस बारे में जवाब देना जल्दबाजी होगी। वे सोमवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र सम्मेलन में भाग लेंगे।
उन्होंने कहा, सहिष्णुता हमारे रक्त में है। पीके जैसी मूवी इसका उदाहरण है। मगर सवाल यह है कि दिल्ली के एक चर्च पर हमला होता है तो सब विरोध करते हैं, जब मंदिरों पर घटनाएं होती हैं तब चुप्पी रहती है।
आज सोशल मीडिया कई चीजों को नकारात्मक प्रचारित करके स्थिति बिगाड़ रहा है। इससे देश की छवि खराब होती है।
सरकार पुरस्कार लौटाने वालों से बात क्यों नहीं करती इस पर उन्होंने कहा कि यह बात सरकार से पूछी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व में तनाव, अपराध, निराशा और आतंक बढ़ रहा है लेकिन भारत में इससे उबरने की भरपूर ताकत है।
आतंकवाद दुनिया के लिए बड़ा खतरा है और सबको मिलकर इसका सामना करना पड़ेगा। पेरिस में हमले के बाद पूरा यूरोप हिल गया लेकिन भारत ऐसे हमलों से विचलित नहीं होता है।
हम अक्सर ही आतंकवाद सह रहे हैं। हमारे भीतर हिम्मत है। उन्होंने बताया कि, मार्च में ऑर्ट ऑफ लिविंग दिल्ली में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित करने जा रहा है जिसका उद्देश्य वसुधैव कुटुंबकम है।