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दीये जला कर मनाएं खुशियां, पटाखों को कहें ना बाबा ना

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वाराणसी। दिवाली पर मिट्टी के दीये और मोमबत्ती जलाकर खुशियां मनाएं और पटाखों से तौबा करें। यह अपील जिले के व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों ने अमर उजाला की मुहिम 'एक युद्ध, पटाखों के विरुद्ध ' से जुड़कर की है। व्यापारियों का कहना है कि कोरोना काल में हम वैसे भी वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। पटाखों का धुआं व शोर प्रदूषण की समस्या को और भी गंभीर बना देगा। इसलिए हम सभी संकल्प लें कि इस बार धुएं और धमाकों वाले पटाखों से तौबा कर एक दीया अपने पर्यावरण की सुरक्षा की प्रार्थना करते हुए जलाएंगे।
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दिवाली दीपों का पर्व है। आतिशबाजी से दूर रहना चाहिए। पटाखों से प्रदूषण फैलता है, साथ में घायल होने का खतरा रहता है। पशु-पक्षियों को भी इससे बहुत नुकसान होता है। - प्रतीक गुप्ता, महामंत्री, वाराणसी नगर उद्योग व्यापार मंडल
आतिशबाजी के चलते आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। हर साल ऐसा देखने को भी मिलता है कि दुकान और मकान में आग लग गई। इस दिवाली बगैर पटाखों के मना कर हम प्रदूषण से दूर रहें। - मनीष गुप्ता, कोषाध्यक्ष, महानगर उद्योग व्यापार समिति
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आतिशबाजी से हवा जहरीली होती है और बारूद का कूड़ा-कचरा भी बढ़ जाता है। दिवाली खुशियों का पर्व है, इसे घर में हंसी-खुशी के साथ दीये जलाकर मनाना चाहिए। - राजकुमार शर्मा, महामंत्री, काशी व्यापार प्रतिनिधि मंडल
व्यापारियों से अपील है कि आतिशबाजी से बचें। पटाखों पर जितना खर्च करेंगे, उतने में गरीबों में मिष्ठान का वितरण कर देंगे। आसपास के वंचित और असमर्थ लोगों के बीच खुशियां बांटे। - अजीत सिंह बग्गा, अध्यक्ष, वाराणसी व्यापार मंडल
पटाखों से सिवाय नुकसान के और कुछ नहीं हासिल होता है। आग लगती है, लोगों की दुकान और मकान जलते हैं। कोरोना काल की इस दिवाली आतिशबाजी से परहेज करें। - रूद्र प्रताप सिंह, अध्यक्ष, सोनातालाब पहड़िया व्यापार मंडल
पटाखों से हवा जहरीली हो जाती है। आदमी के साथ ही पशु-पक्षी भी कई दिन तक परेशान रहते हैं। बच्चे, बुजुर्ग और बीमार शोर व धुएं से काफी प्राभावित होते हैं। ऐसी आतिशबाजी से भला क्या फायदा है। - अखिलेश मिश्रा, पूर्वांचल प्रभारी, कैट
लोगों को मिष्ठान, दीये और मोमबत्ती बांट कर दिवाली मनानी चाहिए। धुएं वाले कानफोडू़ पटाखों से दूरी बनाएं। इस बार आतिशबाजी न करने के लिए सभी अभी से ही जागरूक करें। - निशान कुमार राय, युवा प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल
पटाखे किसी भी तरह से मानव जीवन और पर्यावरण के लिए लाभदायक नहीं हैं। बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए अब हमें आतिशबाजी से तौबा करनी चाहिए। - गौरव सोनेजा, युवा जिलाध्यक्ष, फेडरेशन आफ आल इंडिया व्यापार मंडल
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