श्रद्धालुओं को भगवान धनवंतरि के अमृत रूपी प्रसाद का वितरण किया जाता है। रात को ठीक 10 बजे मंदिर का कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया जाएगा। उसके बाद अगले साल धनतेरस को ही खुलेगा। राजवैद्य परिवार के पं. राम कुमार शास्त्री, नंद कुमार शास्त्री एवं समीर कुमार शास्त्री अब भगवान के पूजन एवं सार्वजनिक दर्शन की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।