वाराणसी। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के पादप सुरक्षा विज्ञानी डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि भारत सरकार ने मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग को मंजूरी दी है। फसल सुरक्षा के लिए छह दिन पुराना छाछ भी पांच लीटर प्रति दो सौ लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा दशपर्णी, नीमार्क, सोंठार्क का इस्तेमाल करके भी फसलों को बीमारियों, कीट-पतंगों से बचाया जा सकता है।
डॉ मनोज शनिवार को उदय प्रताप कॉलेज में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान व एग्री विजन के सहयोग से आयोजित प्राकृतिक खेती से कृषि उद्यमिता विषयक दो दिवसीय कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मशरूम अपनी पौष्टिकता एवं औषधीय गुणों की वजह से विशेष हो गया है। जबरदस्त मांग बढ़ी है। तीन सौ से अधिक मशरूम की प्रजातियां हैं, जिसमें से 20 खाने योग्य हैं। इनमें से छह प्रजातियां उत्तर प्रदेश में उगाई जाती हैं। बटन मशरूम तथा ओयस्टर मशरूम को पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती में उगाया जा सकता है । डॉ. विशाल दीक्षित ने कहा कि अधिकांश शहरी आबादी मधुमेह तथा हृदय रोग जैसी बीमारियों से जूझ रही है जिसके समाधान के लिए खाने में मोटे अनाजों को शामिल करके बहुत हद तक निजात पाई जा सकती है। चौथे सत्र में प्रवीण श्रीवास्तव ने केंचुए की खाद बनाने की विधि की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. संदीप शर्मा, पद्मश्री चंद्रशेखर सिंह, आकाश सिंह चंदेल, अनुराग कुमार, अंतरा मुखर्जी, प्रो. मनीष कुमार सिंह मौजूद रहे।