वाराणसी। जिले के अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय में शुक्रवार को जयतु जयतु लंकेश के दूसरे संस्करण पर साहित्यिक परिचर्चा हुई। इस दौरान शब्दों में शेष पुस्तक का विमोचन भी हुआ। राजकीय पुस्तकालय में लेखक एवं शिक्षाविद डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़ की रचित पुस्तक जयतु जयतु लंकेश पर परिचर्चा हुई। डॉ. राम सुधार सिंह ने कहा कि रामकथा को समझने के लिए जयतु जयतु लंकेश का अध्ययन आवश्यक है। डॉ. अत्रि भारद्वाज ने कहा कि रावण अत्यंत विद्वान होने के बावजूद भी अपने अहंकार के कारण अपयश के भागीदार बने। प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि मनुष्य का अहंकार ही उसके पतन का कारण बनता है। डॉ. देवेंद्र कुमार सिंह ने भी विचार रखे। इसमें दिवंगत अभियंता महेश कुशवाहा की कृति शब्दों में शेष का उनके सुपुत्र भरत कुशवाहा व उपस्थित विद्वानों ने विमोचन किया। वक्ताओं ने डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़ के पौराणिक-ऐतिहासिक विमर्श और भाषा-शैली की सराहना की। पुस्तक का प्रकाशन सर्व भाषा ट्रस्ट ने किया है। संचालन अरुण कुमार मिश्र ने किया। इस अवसर पर सुरेश कुशवाहा, शुभम पांडेय, वर्षा गुप्ता, प्रियम तिवारी, शैलेंद्र कुमार और शुभम दुबे मौजूद रहे। ब्यूरो