सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में कयर बोर्ड की ओर से उद्योग का कार्य क्षेत्र एवं अवसर विषय पर एक दिवसीय सेमिनार हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि, एमएसएमई इकाइयों के सदस्य और विद्यार्थी शामिल हुए। सेमिनार के मुख्य अतिथि खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के असिस्टेंट डायरेक्टर केपी मिश्रा ने ग्रामोद्योग व स्वरोजगार में कयर उद्योग पर कहा कि युवाओं को कयर बोर्ड आत्मनिर्भरता की दिशा देता है। वहीं, एमएसएमई डेवलपमेंट इंस्टिट्यूट के असिस्टेंट डायरेक्टर राजेश कुमार चौधरी ने कयर आधारित इकाइयों की स्थापना, वित्तीय सहायता योजनाओं और विपणन अवसरों की जानकारी दी। अध्यक्षीय संबोधन में प्रदीपन वी ने कयर उद्योग की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संभावनाओं, सतत विकास में योगदान और उद्यमिता संवर्धन पर जोर दिया। तकनीकी सत्र में सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर के. राजा व सुमि सेबेस्टियन ने आधुनिक निर्माण तकनीक, उत्पाद विविधीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण व निर्यात संभावनाओं पर जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि कयर 100 प्रतिशत प्राकृतिक, जैव-अवक्रमणीय और पर्यावरण-अनुकूल रेशा है, जो ग्रामीण रोजगार व महिला सशक्तीकरण में अहम भूमिका निभा सकता है। संचालन प्रशांत पाठक ने किया। इस दौरान सुधीर पाठक, प्रशांत पाठक, रामतेज पाठक और रोहित सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
क्या है कयर उद्योग : कयर उद्योग ऐसा कृषि आधिरित ग्रामोद्योग है जिससे देश के प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों के 7 लाख से अधिक श्रमिकों को रोज़गार मिला हुआ है।