वाराणसी में स्थित डीजल रेल कारखाना (डीरेका) अगले सत्र से रेलवे के लिए डीजल इंजन नहीं बनाएगा। 2019-20 से यहां केवल विद्युत रेल इंजनों का उत्पादन होगा। रेलवे बोर्ड से डीरेका को विद्युत इंजन बनाने का ही लक्ष्य दिया गया है।
आने वाले दिनों में निर्यात और गैर रेलवे ग्राहकों की मांग पर ही डीजल इंजनों का निर्माण किया जाएगा। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2018-19 में केवल 20 प्रतिशत डीजल इंजन ही बनाए जाएंगे। डीरेका में 2016-17 में केवल दो और 2017-18 में 25 विद्युत इंजनों का उत्पादन किया गया। 2018-19 के लिए 173 विद्युत इंजनों के उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था।
रेलवे बोर्ड ने अक्तूबर, 2018 में इसे बढ़ाकर 400 कर दिया। 2018-19 से 2021-22 तक डीरेका को कुल 998 विद्युत इंजन बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इसको आधार बना कर अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में किए गए बदलाव पर विवाद चल रहा है। मामले में डीरेका प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि विद्युत इंजनों के ज्ञान क्षेत्र के विशेषज्ञों को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस परिवर्तन से किसी अधिकारी या कर्मचारी की पदोन्नति एवं करियर पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। अपनी स्थापना से नवंबर 2018 तक डीरेका ने 8306 रेल इंजन बनाए हैं। इसमें 11 देशों को निर्यात किए गए 156 रेल इंजन भी शामिल हैं।