फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विचारों की भिन्नता ही जीवित समाज और लोकतंत्र की पहचान

विज्ञापन
करनई स्थित सेनानी वृंदावन मिश्र स्मृति परिसर में सेनानी वृंदावन मिश्र के चित्र के समक्ष श्रद्धा - फोटो : BALLIA
विज्ञापन
बलिया। अमर सेनानी वृंदावन मिश्र स्मृति सोबईबांध (करनई) में शनिवार को विचार-गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ सेनानी वृंदावन मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। लोकतंत्र सेनानी पांडेय गोविंदजी ने कहा कि विचारों की भिन्नता ही जीवित समाज और लोकतंत्र की पहचान है। संघर्ष की ताकत को समाज पहचाने और उसे मरने न दें। यह जीवित समाज की जिम्मेदारी है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए कहा कि राजनीति भोग का नहीं, योग की चीज है। इस योग के लिए संघर्ष और उपवास का रास्ता चुनना होगा। लार्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था को बदलने की मांग करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कहा कि शिक्षा ने ही देश के बड़े नेताओं और सेनानियों को पैदा किया। आज शिक्षा को व्यापार बनाकर अपने मूल को काटने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपने पुरखों को और उनके संघर्षों को याद नहीं करता, वह समाज मर जाता है। देश के बलिदानियों को हमारी देश की सरकारें और राजनीतिज्ञों ने उचित सम्मान नहीं दिया। मौके पर पत्रकार दिग्विजय सिंह और मध्य प्रदेश के सतना के वरिष्ठ समाजवादी कुंज बिहारी अग्निहोत्री को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। मौके पर अजय बहादुर सिंह, रविंद्रनाथ पांडेय, परमात्मा नंद पांडेय, संतोष शुक्ल, रामगोविंद प्रजापति, लक्ष्मण यादव, अशोक राय, राजकुमार पांडेय, डॉ. वीरेंद्र राय, विजय शंकर चौबे, वासुदेव ठाकुर, राघव, स्वतंत्रदेव, चंद्रिका पासवान, ओमप्रकाश पांडेय आदि ने सभा को संबोधित किया। अध्यक्षता लोकतंत्र सेनानी शुभ्रांशु शेखर पांडेय तथा संचालन द्विजेंद्र कुमार मिश्र ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें