ऐसे हो रहा काम
केमिकल इंजीनियरिंग विभाग परिसर में लगे मिनी प्लांट पर हर दो दिन पर हॉस्टल से प्लास्टिक यहां जमा हो रहा है और फिर डीजल बनाया जा रहा है। इसके लिए कुछ युवा हॉस्टल-हॉस्टल जाकर छात्रों को प्लास्टिक एक जगह जमा करने की अपील कर रहे हैं। औसतन दो दिन में 10 से 15 किलोग्राम प्लास्टिक के इस्तेमाल से 7 से 8 लीटर डीजल निकल रहा है।
तकनीकी संस्थानों में लगने वाला यह पहला प्लांट हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर काम शुरू हो गया। जल्द ही बड़ा प्लांट भी लगाया जाएगा, जिससे कि आम लोग भी प्लास्टिक जमा कर सकें। इसके बाद टोकन लेकर उन्हें भी डीजल दिया जाएगा।-प्रो.पीके मिश्रा, आईआईटी बीएचयू