ज्येष्ठ पूर्णिमा पर शनिवार को दुर्गाकुंड स्थित दुर्ग विनायक गणेश मंदिर में जल विहार की झांकी सजाई गई। भक्तों को तापत्रय से मुक्ति दिलाने के लिए मंदिर खुलने से लेकर शयन आरती तक करीब 18 घंटे भगवान प्रथमेश ने जलाशय बने गर्भगृह में जलक्रीड़ा की। भक्तगण बाबा गणपति को इस जलाशय में देखकर आनंदित हो उठे।
शनिवार को जल विहार झांकी के अवसर पर मंदिर के गर्भगृह को जलाशय का रूप प्रदान किया गया। जलाशय में 108 कमल के पुष्प सजाए गए। जलाशय के चारों ओर हरियाली और पूरे मंदिर को फूल-मालाओं, अशोक की पत्तियों से सजाया गया। शाम 7 बजे भगवान गणपति की विराट आरती की गई। रात 9:00 बजे भगवान को खीर और बूंदी का भोग लगाया गया। भोग लगाने के बाद भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान पुजारी अशोक मिश्रा, निर्भय उपाध्याय, अंकित उपाध्याय मौजूद रहे।