1990 में त्याग दिए थे प्राण
बाबा अवतारी पुरुष माने जाते थे। इसीलिए उनके जन्म को लेकर अभी तक कोई ठोस तथ्य नहीं मिलता है। राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि देवरिया जिले के लार रोड क्षेत्र के सरयू के तट पर स्थित मइल गांव में उनकी तपस्थली है। यही पर वह आठ माह रहते थे।
कुछ संतों का कहना है कि देवरिया ही उनका जन्म स्थान है। कुछ उनके जीवित रहने के संबंध में 250 साल तो कुछ 500 साल बताते हैं। उन्होंने बताया कि देवरहा बाबा ने वृंदावन में यमुना तट पर 19 जून 1990 को योगिनी एकादशी (आषाढ़ मास) के दिन प्राण त्याग दिए थे।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी किए थे देवरहा बाबा के दर्शन
प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, महामना मदन मोहन मालवीय, विश्वनाथ प्रताप सिंह, अटल बिहारी बाजपेयी, पुरुषोत्तमदास टंडन, लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, कमलापति त्रिपाठी आदि नेताओं ने उनके दर्शन किए थे।
राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जब इंदिरा गांधी हार गईं तो वह भी देवराहा बाबा से आशीर्वाद लेने देवरिया उनके आश्रम में गईं थीं। बाबा ने अपने हाथ के पंजे से उन्हें आशीर्वाद दिया, तभी से कांग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ का पंजा बन गया और 1980 में हुए चुनाव में वह प्रचंड बहुमत से जीती थीं।
पुण्यतिथि पर नवाह्न पारायण शुरू
द्वारिकाधीश मंदिर देवरहा बाबा आश्रम में नवाह्न पारायण 24 जून से देवरहा बाबा की पुण्यतिथि तक योगिनी एकादशी यानी दो जुलाई तक चलेगा। राम अभिलाष दास महाराज ने बताया कि 41 वेदपाठी सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक नवाह्न पारायण कर रहे हैं। इसके बाद साधु-संतों का भोज और शाम को चार बजे से प्रवचन, भजन कीर्तन होता है।