दशाश्वमेध घाट पर स्नान करते श्रद्वालु
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माघी पूर्णिमा और चंद्रग्रहण पर बुधवार की शाम काशी के गंगा तट पर आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। रात नौ बजे चंद्रग्रहण के समापन के बाद शुरू हुआ स्नान-पूजन का सिलसिला देर रात तक चला। ठंड के बाद भी प्रमुख घाटों पर स्नानार्थियों की खासी भीड़ रही।
स्नान-दान के बाद श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ और अन्नपूर्णा मंदिर सहित अन्य देवालयों में विधिविधान से पूजा-अर्चना की। ग्रहण मोक्ष के बाद रात नौ बजे दशाश्वमेध घाट पर हुई गंगा आरती में हजारों आस्थावान शामिल हुए।
चंद्रग्रहण और माघी पूर्णिमा के चलते शाम से ही घाटों पर श्रद्धालु जुटने लगे थे। चंद्रग्रहण शाम को 5:18 से रात 8:42 बजे तक रहा जबकि सूतक ग्रहण नौ घंटे पहले ही लग गया था।
चंद्रग्रहण की वजह से विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन, अन्नपूर्णा, गौतमेश्वर महादेव मंदिर सहित शहर के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। इस दौरान दर्शन-पूजन आदि अनुष्ठान नहीं हुए। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती के बाद दोपहर तीन बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
रात नौ बजे हुई गंगा आरती
घाट पर स्नानार्थियों की रेला
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ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई और विग्रहों को स्नान कराकर शृंगार-पूजन शुरू हुआ। इसके बाद दर्शन-पूजन के लिए पट खोले गए। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्नपूर्णा, बड़ा गणेश एवं संकटमोचन मंदिर में देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
वहीं दशाश्वमेध एवं प्राचीन दशाश्वमेध घाट की नित्य गंगा आरती ग्रहण मोक्ष के बाद रात नौ बजे हुई। राजघाट पर होने वाली आरती सुबह ही संपन्न हो गई थी। ज्यादातर श्रद्धालुओं ने भोर में तीन से पांच बजे के बीच सूतक काल शुरू होने के पहले ही स्नान-दान और दर्शन-पूजन कर लिया।
फिर ग्रहण मोक्ष के बाद रात नौ बजे से स्नान और दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक चला। माघी पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए रैन बसेरों के अलावा कैंट, सिटी स्टेशन, काशी स्टेशन एवं बस स्टेशन पर भी बाहर से आए तमाम श्रद्धालु ठहरे थे।
दशाश्वमेध एवं शीतला घाट पर अधिक भीड़ रही। प्रमुख घाटों पर बैरिकेडिंग की गई थी। यातायात नियंत्रण की वजह से लोग घाट वाले मार्ग पर पैदल जा रहे थे।