कला प्रकाश और अविरल गंगा की ओर से रविवार की शाम शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम राग-रंग का आयोजन हुआ। कोलकाता के युवा शास्त्रीय गायक व उस्ताद राशिद खां के शिष्य देवार्घ्य रॉय ने सामने घाट स्थित होटलमें आयोजित कार्यक्रम में शास्त्रीय गायन प्रस्तुत कर श्रोताओं को आनंदित किया।
राग-रंग में देवार्घ्य ने गायन की शुरुआत राग भीमपलासी से किया। इसके बाद विलंबित एक ताल में अब तो बड़ी बेर भई... ख्याल की प्रस्तुति दी। तीन ताल में जा जा रे अपने मंदिरवा... बंदिश की सुंदर प्रस्तुति दी। इसके बाद राग मारवा में मध्य लय तीनताल की रचना ऐ री कैसे जाऊं मैं... का गायन कर राग देश की ठुमरी से सभी को भाव विभोर कर दिया। राग भैरवी में भजन प्रस्तुत कर कार्यक्रम का समापन किया। तबले पर कृष्णेंदु पॉल और हारमोनियम पर हर्षित उपाध्याय ने संगत की। कार्यक्रम के पूर्व डॉ. गौतम चक्रवर्ती, डॉ. उन्मेष चक्रवर्ती एवं डॉ. अतुल्य रतन ने कलाकारों का स्वागत किया। इस दौरान सितार वादक पंडित रबिंद्र नारायण गोस्वामी और प्रो कृष्णकांत शर्मा मौजूद रहे। धन्यवाद अशोक कपूर, संचालन डॉ. आशीष जायसवाल और संयोजन अभिजित अग्रवाल ने किया।