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नार्थ ईस्ट डेस्टीनेशन: लोक कला की प्रस्तुति के साथ परिधानों से सजे स्टॉल, देखें कला-संस्कृति का संगम

Mon, 25 Nov 2019 12:04 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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नार्थ ईस्ट डेस्टीनेशन में कला और संस्कृति का संगम। - फोटो : अमर उजाला
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कहीं लकड़ी के खिलौने तो कहीं लोक पंरपराओं पर आधारित परिधानों से सजे स्टाल। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में खान-पान, कलाकृतियों की झलक। इन सभी का संगम आपको इन दिनों आईआईटी बीएचयू परिसर में चल रहे नार्थ ईस्ट डेस्टीनेशन समारोह में देखने को मिल रहा है। खेलकूद की प्रतिस्पर्धाओं के बीच लकड़ी के सामानों से तैयार किए गए सजावटी सामानों की खरीदारी करने वालों की भीड़ लगी रही।

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आईआईटी बीएचयू के तकनीकी ग्राउंड पर चल रहे इस समारोह में मिजोरम, मेघालय, मणिपुर, अरुणांचल प्रदेश, असम आदि राज्यों से आए कलाकार अलग-अलग प्रस्तुतियों के माध्यम से सांस्कृतिक झलक दिखा रहे हैं। इसमें असम राइफल्स के स्टॉल पर वीर सपूतों की कहानियों के साथ ही जवानों के परिवारीजनों की ओर से तैयार परिधान, सजावटी सामान भी सजाए गए हैं।

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इस बीच दूसरे दिन भी केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने स्टॉलों का अवलोकन कर कलाकारों के प्रयास को सराहा। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजन के पीछे लोगों को देश की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराने के साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों के बारे में जानकारी देना भी उद्देश्य है। इस दौरान असम राइफल्स की ओर से तैयार सेल्फी प्वाइंट पर लोगों ने परिवार संग पहुंचकर सेल्फी लेकर इस समारोह को यादगार बनाया।

बंबू खींच प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र
समारोह के दूसरे दिन बंबू खींच प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। इसमें पूर्वोत्तर राज्यों से आए प्रतिभागियों के बीच हुई प्रतियोगिता को देखने वालों की भीड़ रही। रस्सी खींच प्रतियोगिता की तरह ही एक बंबू को दोनों तरफ से खींचने की प्रतियोगिता में काशी के युवाओं ने भी दमखम दिखाया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच इस प्रतियोगिता को देखने पहुंचे डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी काशी के युवाओं की प्रतिभागिता को सराहा। 

आन द स्पॉट पेंटिंग के जरिए कलाकृतियों को सहेजने का संदेश 
समारोह में कलाकृतियों को सहेजने का संदेश पेंटिंग के जरिए दिया जा रहा है। यहां लगे दो स्टॉलों पर कलाकार आन द स्पाट पेटिंग बनाते नजर आ जाएंगे। इसमें पूर्वोत्तर राज्यों की कला, संस्कृति के साथ ही काशी के घाट, गंगा आरती के चित्रों के साथ ही प्रकृति के संरक्षण पर आधारित चित्र बन रहे हैं। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से इसकी खरीददारी भी कर रहे हैं।
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साज-सज्जा में बांस का अधिक इस्तेमाल
समारोह में साज-सज्जा के साथ ही वहां मिलने वाले सामानों में सर्वाधिक बांस के बने सामान हैं। इसमें टोपी, सोफा, बेंच, झालर के साथ ही बांस की आलमारी के साथ ही गमले, गुलदस्ते भी  लगाए गए हैं। 
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