दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को रोजगार मुहैया कराने के लिए सरकार ने कामधेनु योजना शुरू की है लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। डेयरी संचालन के लिए बैंकों से ऋण दिए जाने की सुविधा उपलब्ध है फिर भी आवेदन करने वालों की संख्या कम है।
रामनगर में डेयरी का संचालन होता है। इसके अलावा शहर में कहीं बड़े पैमाने पर दुग्ध उत्पादन इकाई नहीं है। मालूम हो कि सरकार की ओर से दुग्ध उत्पादन के लिए तीन तरह की योजनाएं संचालित हैं। इसमें 26 लाख से लेकर करीब सवा करोड़ तक का बैंक ऋण उपलब्ध है। सरकार की ओर से यह ऋण सालाना 12 फीसदी ब्याज पर देने का प्रावधान है। कामधेनु योजना में सिर्फ तीन लोगों ने आवेदन किया है जिन्हें डेयरी स्थापित करने की स्वीकृति भी मिल चुकी है।
वहीं मिनी कामधेनु योजना मेें नौ लोगों को स्वीकृति दी जा चुकी है और आवेदकों का लोन भी पास हो चुका है। इसी तरह माइक्रो कामधेनु योजना में अब तक कुल 20 आवेदन आए हैं और सात लोगों को स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें दो लोग डेयरी लगाने का काम भी शुरू कर दिए हैं।
शहर में कोई सहकारी दुग्ध उत्पादन इकाई नहीं है। रामनगर में डेयरी है। इसी से पैकेटबंद दूध का वितरण शहर में होता है। इसके अलावा जिले के ग्रामीण इलाकों से दूध आता है। गांव से शहर तक दूध आसानी से पहुंच सके इसके लिए मुफ्त में दुग्ध वाहन भी संचालित किए जा रहे हैं।