संगठन का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के लिए संबंधित एजेंसियों और सरकार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि एनटीए का स्थायी ढांचा नहीं होने के बावजूद उसके माध्यम से बड़ी संख्या में परीक्षाएं कराई जा रही हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं की घटनाएं बढ़ी हैं। साथ ही, उच्च शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और महंगी फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा कठिन होती जा रही है।
ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गई कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें, एनटीए को तत्काल भंग किया जाए, नई शिक्षा नीति-2020 को वापस लिया जाए, सभी रिक्त शैक्षणिक एवं सरकारी पदों पर पारदर्शी तरीके से समयबद्ध भर्ती कराई जाए तथा नीट पेपर लीक से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
इस दौरान एआईएसए जिला अध्यक्ष शेख नाजमा खातून, प्रदेश कमेटी सदस्य शेख अमीना खातून उर्फ चारु, श्रुति भारतीय, श्वेता चौहान, शेख अजीज उर्फ भगत सिंह, अरमान मंसूरी, शेख अशफाकउल्ला खान उर्फ सुखदेव, भाकपा (माले) नेता शेख मोहम्मद, कलीम अंसारी आदि मौजूद रहे।