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वर्ल्ड ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी डे : BHU में 10 साल में आए DMD के 3500 मरीज, परिजनों को नहीं मिली सरकारी मदद

Sat, 07 Sep 2024 05:48 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: लाइलाज अनुवंशिक बीमारी के कारण परिजन आज भी परेशान हो रहे हैं। न सरकारी सुविधाएं मिलती हैं न ही समुचित रिसर्च ही हो पा रहा है। दो महीने पहले रिसर्च का प्रपोजल दिया गया था।
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बीएचयू अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्ल्ड ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी डे पर लाइलाज आनुवंशिक बीमारी के खिलाफ जागरूकता जरूरी है। मां के गर्भ में शुक्राणु और अंडाणु बनने के समय एक या ज्यादा जीन टूटने से बच्चे में होने वाली इस बीमारी के बीएचयू में 10 वर्षों में करीब 3000 मरीजों के सैंपल लिए जा चुके हैं। बीमार बच्चों के परिजनों ने राज्य सरकार से मुफ्त फिजियोथेरेपी और पैसे की मांग की है, लेकिन कोई मदद नहीं मिली है। बीमारी पर समुचित रिसर्च भी नहीं हो पा रहे हैं।

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बीएचयू के सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर के हेड डॉ. अख्तर अली ने बताया कि दुनिया में जन्म लेने वाला हर 3500वां लड़का इस बीमारी से ग्रसित है। कुछ दवाएं क्लीनिकल ट्रायल में हैं। नीदरलैंड में एग्जॉन एस्कीपिंग थेरेपी दी जाती है। भारत में यह उपलब्ध नहीं है। डॉ. अली ने बताया कि दो महीने पहले रिसर्च का प्रपोजल दिया गया है। इसमें एग्जॉन एस्कीपिंग थेरेपी को मॉडिफाई कर और बेहतर इलाज की बात कही गई है।

दो से पांच वर्ष बाद सामने आते हैं लक्षण
बच्चे के पैदा होने के दो से पांच साल बाद इसके लक्षण सामने आते हैं। इसमें हाथ-पैर और रीढ़ मुड़ने लगती है। मांस पेशियों के सिकुड़ने से फेफड़े काम नहीं करते। हार्ट अटैक या लंग्स फेलियर से 20 साल की उम्र तक मौत हो जाती है। बीएचयू में 3500 मरीजों के सैंपल हैं, लेकिन रिसर्च के लिए कोई मदद नहीं है। वहीं, यूपी में इन मरीजों को न तो मुफ्त फिजियोथेरेपी मिल रही और न ही कोई सरकारी सुविधा।

फिजियोथेरेपी एकमात्र उपाय
इन मरीजों को जिंदा रखने का एक मात्र उपाय फिजियोथेरेपी है। निजी केंद्रों पर एक बार का 300 रुपये चार्ज लगता है। हर महीने तो नौ हजार रुपये खर्च होता है। दवाओं का खर्च मिलाकर 15 से 20 हजार रुपये हर महीने खर्च होता है।
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ऐसे होती है डीएमडी की पहचान
  • - पैरों के नीचे की काफ मसल (घुटने के नीचे वाला हिस्सा) ठोस हो जाती है।
  • - श्वांस में अनियमितता या फूलने की समस्या।
  • - बच्चा जब जमीन पर हाथ या कोई दूसरा सहारा लेकर खड़ा हो।
  • - उम्र बढ़ने के दौरान पीठ एक ओर मुड़ने लगती है।

बढ़ाने होंगे जागरूकता के प्रयास
वाराणसी के 200 डीएमडी रोगियों को रजिस्टर्ड करा चुके समाजसेवी जयंत सिंह कहते हैं कि देश भर में डेढ़ लाख मरीज हैं। हर साल 300 से ज्यादा मरीज पीजीआई में आ रहे हैं। बीएचयू ने आरटीआई में जवाब दिया कि 600 मरीज आते हैं। कुछ मरीज झाड़-फूंक कर सही कराने में लग जाते हैं। कुछ इसे पोलियो या लकवा मान लेते हैं। जागरूकता के प्रयासों को बढ़ाना होगा। यूपी में जाे भी प्रावधान है, वो 18 साल के बाद है।
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