जबकि अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से दलील दी गई कि वह देवता के भक्त हैं। वाद मित्र रखे जाने से भगवान विश्वेश्वरनाथ का पक्ष मजबूत होगा। अन्य पक्षकारों अंजुमन इंतजामिया मसजिद कमेटी और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से वाद मित्र रखे जाने का विरोध किया गया।
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आठ मार्च तक आदेश सुरक्षित कर लिया। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर निर्णय आने के बाद अदालत में ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण, पूजापाठ और जीर्णोद्धार संबंधी वर्ष 1991 से लंबित मुकदमे की सुनवाई शुरू होगी।