सीओ पिंडरा अभिषेक पांडेय और एसडीएम न्यायिक सदर ज्ञानप्रकाश ने आक्रोशित परिजनों और लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। वहीं, परिजनों ने मांग किया कि बालेश्वर की मां को पेंशन, पत्नी को पेंशन, आर्थिक मदद राशि 50 लाख और अन्य एक भाई को नौकरी दी जाए।
एसडीएम न्यायिक के आश्वस्त किया कि मांगपत्र उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा। उधर, शिवपुर में पोस्टमार्टम के बाद कड़ी सुरक्षा में बालेश्वर का शव परिजनों को सौंपा गया। एसपी ग्रामीण सूर्यकांत त्रिपाठी ने सीओ पिंडरा को मामले में उचित कार्रवाई को निर्देशित किया।
बालेश्वर की मौत पर परिजनों के करुण क्रंदन से माहौल गमगीन हो उठा। पत्नी ऊषा देवी, मां कलावती देवी और तीन बेटे त्रिदेव (9), अंशु (7) व छोटू (3) बेसुध रहे। वहीं, मौजूद लोगों ने कहा कि तीन साल से मृतक आश्रित कोटे की नौकरी के लिए चक्कर लगाते हुए बालेश्वर ने प्राण त्याग दिया।
स्वर्गीय हीरालाल कीछह संतान में बालेश्वर सबसे बड़ा था। विद्यालय में नौकरी कर अपने परिवार की माली हालत सुधारने का सपना सजोए बालेश्वर के हक में सिर्फ मौत ही मिली। पत्नी और बच्चे अनाथ हो गए। लोगों के मन में प्रधानाचार्य के प्रति काफी गुस्सा और उबाल था।
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