बूढ़ी मां का सहारा था सद्दाम
सद्दाम की बूढ़ी मां जुबैदा का रो रो कर बुरा हाल है। क्योंकि इतनी छोटी उमर में ही कमाकर उसके हाथ पर दो पैसे रखने वाला चला गया था। उसके गांव के प्रधान दिनेश सिंह ने बताया कि सद्दाम बचपन में ही अपने पिता अनवर को खो चुका था। बड़ा भाई फिरोज परिवार से अलग होकर परिवार सहित मुंबई में रहता है।
दूसरा नफीश गांव में रहकर मजदूरी करता है। सद्दाम ने होश संहालते ही मां की मजबूरी समझ लिया था। पढ़ाई लिखाई छोड़कर वह नागपुर में एक रिश्तेदार के यहां सिलाई सीखने चला गया था। वहीं से कमा कर हर माह वह अपनी बूढ़ी मां को पैसे भेजता था। जिससे उसके घर का खर्च चलता था।
काल के गाल में समा चुके हैं चार और भी
गांव के डैम से नदी में कूद कर नहाने के दौरान काल के गाल में समाने वाला सद्दाम पांचवां शख्स था। इसके पहले भी चार लोग नहाते समय ही गांगी की तेज धारा में बहकर अपने प्राण गंवा चुके हैं। जब डैम नहीं बना था तब लगभग 20 साल पहले अरविंद गांगी की धारा में समाया गया था। इसी तरह तीन और लोगों की मौत गांगी के किनारे इसी स्थान पर नहाते वक्त हुई थी। उधर सद्दाम के साथ डैम पर नहाने आए परवेज ने बताया कि नागपुर में वह भी सद्दाम के साथ ही नौकरी करता था। सद्दाम बकरीद मनाने गांव आया था।