पुलिस की पाठशाला में छात्रों के साथ डीसीपी प्रमोद कुमार
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पुलिस कभी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और किसी भी मामले में वीडियो कॉल पर पेशी नहीं होती है। पहले लोगों को सड़क पर लूटा जाता था, अब फोन पर लूटा जा रहा है। आधुनिक तकनीक की वजह से लोग नकदी कम साथ लेकर चलते हैं। बैंक में पैसे रखते हैं, जिस पर साइबर अपराधियों की निगाह है। यह बातें डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार ने बृहस्पतिवार को अमर उजाला के पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में 500 से अधिक बच्चों से कहीं।
छावनी क्षेत्र के केंद्रीय विद्यालय में डीसीपी प्रमोद कुमार ने छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध, ओटीपी फ्रॉड और सोशल मीडिया पर सुरक्षा के प्रति जागरूक कर सावधानी बरतने की सलाह दी। विद्यार्थियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली को समझा और साइबर ठगी की स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी ली।
डीसीपी प्रमोद कुमार ने कहा कि पुलिस से डरे नहीं बल्कि खुलकर अपनी समस्याएं बताएं। ताकि, पुलिस समाधान कर सके। पुलिसकर्मी भी समाज के बीच से ही आते हैं। अगर हम अपनी समस्या को साझा नहीं करेंगे तो अपराध बढ़ेगा। यह देश, राज्य, जिले और नागरिकों के लिए ठीक नहीं है।
डीसीपी ने बच्चों को सुरक्षा का पाठ पढ़ाते हुए उनके अंदर के डर को निकालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। आज के दौर में लोग सोशल मीडिया पर अपना हर पल शेयर कर रहे हैं, इससे बचना चाहिए। गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर भी नहीं ढूंढना चाहिए। इस दौरान प्रधानाचार्य सीबीपी वर्मा ने अमर उजाला की पहल की सराहना की और डीसीपी का स्वागत किया।
बच्चों ने पूछे सवाल
डीसीपी प्रमोद कुमार ने बच्चों को बताया कि वह खुद सरकारी स्कूल से पढ़े हैं। इंजीनियरिंग के बाद सिविल सर्विस की तैयारी की और यूपीएससी में चयन हुआ।