भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष कलश के दर्शन शुरू हो गए हैं। देश विदेश से आए बौद्ध अनुयायियों और उपासकों ने मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर परिसर में अस्थि कलश के दर्शन किए। मंदिर के विहाराधिपति भिक्षु आर सुमितानंद थेरो के नेतृत्व में तीन दिवसीय अनुष्ठान आरंभ हो गए। पांच घंटे में सात हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अस्थि-कलश के दर्शन किए। कार्तिक पूर्णिमा तक श्रद्धालुओं को दर्शन मिलेंगे।
विज्ञापन
बुधवार को मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर स्थित तथागत की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाया गया था। वियतनामी कलाकारों ने बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष दो मयूर बनाए थे, जो आकर्षण के केंद्र थे। मंदिर परिसर में तथागत के अस्थि अवशेष के दर्शन के लिए बौद्ध अनुयायियों की कतार भोर में ही लग गई थी। बौद्ध अनुयायी अपने हाथों में कमल का फूल लेकर कतारबद्ध होकर खड़े थे।
सुबह बौद्ध भिक्षुओं ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात सुबह छह बजे मंदिर के अस्थि अवशेष के दर्शन के लिए खोल दिए गए। दर्शन सुबह 11 बजे तक चला। भिक्षु आर सुमितानंद थेरो ने बताया कि पहले दिन लगभग सात हजार से अधिक बौद्ध अनुयायियों व उपासकों ने दर्शन किए।