परमपावन दलाई लामा शुक्रवार को सारनाथ पहुंचे। धर्मगुरु दलाईलामा के आने से पूरा सारनाथ मिनी तिब्बत में तब्दील हो गया। बौद्ध धर्म को मानने वाले देशों के अलावा काफी संख्या में लामा भी सारनाथ पहुंचे। इसके अलावा तिब्बत से निर्वासित लोग भी अपने धर्मगुरु की झलक पाने के लिए सारनाथ पहुंचे। शुक्रवार को दलाईलामा के आने के दौरान पूरा वातावरण तिब्बत के रंग में रंगा नजर आया।
काशी पहुंचते ही तिब्बती धर्मगुरु ने ट्विट करके सभी के लिए खुशहाली की कामना की है। उन्होंने ट्विटर अकाउंट पर लिखा है कि मुझे विश्वास है कि हम खुशहाल दिल के साथ खुशहाल व्यक्तियों, खुशहाल समुदायों संग खुशहाल मानवता निभा सकते हैं, जिससे बेहतर ढंग से अपने अस्तित्व को संवारा जा सके।
शांत रक्षित पुस्तकाल के पास स्वागत में खड़े पद्मश्री प्रो. रामाशंकर त्रिपाठी ने जब तिब्बती धर्मगुरु को खाता पहनाकर स्वागत किया तो उन्होंने प्रो. त्रिपाठी को गले से लगा लिया। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि धर्मगुरु के दर्शन और उनका सानिध्य पाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार दलाई लामा के आगमन के मद्देनजर तिब्बती संस्था के मुख्य द्वार से लेकर सभा स्थल तक सड़क पर शुभांकर बनाए गए थे।
इन शुभांकर के बारे में तिब्बती संस्थान के प्रोफेसर नवांग तेम्बिल ने बताया कि धर्म के अनुसार 8 वस्तुएं जिसमे शंख, फूल, चक्र, गदा, कलश एवं तीन अन्य कलाकृतियां मंगल कलाकृति मानी गई हैं।
जिसके बनाने से हर काम शुभ होता है। यही आठ कलाकृतियां परम पावन के मार्ग पर बनाई गई हैं ताकि उनका आगमन शुभ और शांति से सम्पन्न हो। उन्होंने बताया कि ये शुभांकर सिर्फ महापुरुषों के आगमन के समय बनाए जाते हैं।
कुलपति प्रो. गेशे नवांग समतेन ने बताया कि तिब्बती सरकार के निर्वासित राष्ट्रपति लोबसंग सेगे, पूर्व प्रधानमंत्री समदोंग रिनपोछे, शिक्षा मंत्री और संस्कृति मंत्री भी स्वर्णजयंती समारोह में हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं।