फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर 9.25 लाख की साइबर ठगी, आरोपी बिहार से अरेस्ट; मर्चेंट QR स्कैनर से करते थे फ्रॉड

Fri, 08 May 2026 05:40 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

Azamgarh News: ठगी की रकम विभिन्न बैंक खातों में मंगाकर अपने खाते में ट्रांसफर कर नकद निकाल लेता था और कुछ धनराशि साथियों को भेज देता था। आरोपी फर्जी दुकान एवं फर्म के नाम पर मर्चेंट क्यूआर स्कैनर तैयार कर उनका इस्तेमाल करता था और अन्य लोगों को भी उपलब्ध कराता था।
विज्ञापन
क्षेत्राधिकारी सदर आस्था जायसवाल। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Cyber Crime: ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर 9.25 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक आरोपी को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन और 1900 रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस मामले में उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।

विज्ञापन




क्षेत्राधिकारी सदर आस्था जायसवाल ने बताया कि पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन तथा अपर पुलिस अधीक्षक यातायात पंकज कुमार श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना टीम ने यह कार्रवाई की।
विज्ञापन


पुलिस के अनुसार, मुबारकपुर थाना क्षेत्र के बम्हौर गांव निवासी मनोज यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म “51गेम” के नाम पर उनसे 9.25 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

विज्ञापन

आरोपियों से पूछताछ कर रही पुलिस

विवेचना के दौरान पुलिस को बिहार के भोजपुर जनपद के आरा थाना क्षेत्र निवासी अविनाश विजय का नाम प्रकाश में आया। आरोपी का पता 439 खुनी गली, शीतल टोला शिवगंज, आरा बताया गया है। उसका एक अन्य पता जमीराबांध, आरा भोजपुर भी है। इसके बाद साइबर क्राइम टीम ने बिहार पहुंचकर सात मई को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर साइबर फ्रॉड की घटनाओं को अंजाम देता था। ठगी की रकम विभिन्न बैंक खातों में मंगाकर अपने खाते में ट्रांसफर करता था और बाद में नकद निकाल लेता था। इसके अलावा कुछ धनराशि अपने साथियों को भी भेज देता था।

पुलिस के मुताबिक आरोपी फर्जी दुकान और फर्म के नाम पर मर्चेंट क्यूआर स्कैनर तैयार करता था। इन्हीं क्यूआर कोड के जरिए साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था। आरोपी ऐसे फर्जी क्यूआर स्कैनर अन्य लोगों को भी उपलब्ध कराता था। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और बैंक खातों की जानकारी जुटाने में लगी है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें