आठ करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन पकड़ में आया
पुलिस ने सारनाथ के कोटवां निवासी अनुराग मौर्य के खाते को खंगालना शुरू किया। उसके खिलाफ तीन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें मिली थीं। पुलिस ने दो साल के रिकॉर्ड को खंगाला तो सामने आया कि खाते से आठ करोड़ का लेनदेन हुआ है। इसके बाद साइबर सेल ने प्राथमिकी दर्ज की। ठगी के पैसों की निकासी कहां-कहां हुई, इसकी जांच अभी चल रही है।
मनी ट्रेल और लेयरिंग की जांच जारी, नेटवर्क की अंतिम कड़ी एटीएम से निकासी
अब तक की जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों ने वित्तीय धोखाधड़ी और ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए म्यूल खातों का एक छिपा नेटवर्क तैयार कर रखा है। इसमें कमीशन का लालच देकर या धोखे से भोले-भाले लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। कई मामलों में चालू खाते भी किराये पर लिए जाते हैं। साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी गई रकम सीधे अपराधियों के खाते में न जाकर पहले इन्हीं म्यूल खातों में पहुंचाई जाती है। इसके बाद रकम को तेजी से कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर उसकी ट्रेल छिपाने की कोशिश की जाती है। इसे लेयरिंग सिस्टम कहा जाता है। नेटवर्क की अंतिम कड़ी में रकम एटीएम से नकद निकाली जाती है या अन्य माध्यमों से बदल दी जाती है।
म्यूल खातों पर कार्रवाई जारी है। संदिग्ध लेन-देन की जांच के लिए बैंकों से भी मदद ली जा रही है। एनसीआरपी पर दर्ज मामलों की जांच साइबर सेल की टीम कर रही है। कई खाते अभी भी जांच के दायरे में हैं। -विनय द्विवेदी, सहायक पुलिस आयुक्त, साइबर