जिले में 26 हजार से ज्यादा सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को बैंक खाते और एटीएम कार्ड के प्रति एहतियात बरतने की जरूरत है। दरअसल, साइबर ठगों की नजर इन पर है। ऐसे में यदि ये वरिष्ठ नागरिक साइबर क्राइम के शिकार हो जाएं तो इनकी मदद के लिए ऐसा कोई फोरम नहीं है जो घर बैठे इनकी शिकायतों का समाधान कर सके।
साइबर ठग पेंशनर्स को बहुत आसानी से सेवानिवृत्त कर्मियों के बैंक खाते का विवरण उन्हीं से हासिल कर उन्हें चपत लगा रहे हैं। मोबाइल पर मैसेज बॉक्स में आने वाले ओटीपी और नोटिफिकेशन को जालसाज बाईपास कर देते हैं, इससे बैंक खाते से हो रही लेनदेन का मैसेज अलर्ट नहीं मिलता। ऐसे में सतर्कता ही बचाव का एकमात्र उपाय है। इसके साथ ही ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो प्रार्थना पत्र देकर उसे बंद कराना बेहतर होगा।
केस एक
दो सगे भाइयों ने बुजुर्ग को लगाई सवा तीन लाख की चपत
खुटहां गांव निवासी बुजुर्ग महावीर बाबूनंदन जैसवार के खाते से 3.14 लाख रुपये गायब हो गए। साइबर थाने की पुलिस की जांच में सामने आया कि उनके पड़ोस के दो सगे भाइयों ने मदद के बहाने उनके खाते के विवरण लेकर उसे अपने पेटीएम एकाउंट से लिंक कर रुपये निकाले थे। पुलिस ने 91 हजार रुपये बरामद किए और शेष राशि नहीं मिल सकी।
केस 2
पता ही नहीं लगा और खाते से निकल गए 90 हजार
सुसुवाही क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहने वाले एक कंपनी के रिटायर्ड मैनेजर श्रवण कुमार पांडेय अपनी बेटी को ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर कर रहे थे। इसी दौरान न जाने क्या चूक हुई कि उनके बैंक खाते से 90 हजार रुपये किसी जालसाज ने निकाल लिए। शिकायत के बावजूद न कोई पकड़ा गया और न पैसे वापस मिले।
केस 3
रिटायर्ड ससुर के पैसे दामाद ही उड़ा रहा था
अर्दली बाजार क्षेत्र के अजय कुमार बीएसएनएल से सेवानिवृत्त हैं। बेटा न होने के कारण उनकी बेटी और दामाद साथ रहते हैं। दामाद अमित की नीयत ससुर के पैसों को लेकर खराब हुई तो वह उनके खाते से चार महीने में 5.90 लाख रुपये निकाल लिए। शिकायत करने पर सर्विलांस की मदद से दामाद तो पकड़ा गया लेकिन पैसा नहीं मिला।
बैंक और पुलिस से संपर्क करने में देरी न करें : एसएसपी
एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि सभी को अपने बैंक के टोल फ्री नंबर और स्थानीय शाखा का नंबर हमेशा अपने पास रखना चाहिए। कभी भी बैंक खाते संबंधी कोई गड़बड़ी समझ में आए तो टोल फ्री नंबर और स्थानीय शाखा को फोन कर सूचित करने में देरी न करें। इसके साथ ही 112 नंबर या अपने नजदीकी थाने के थाना प्रभारी को भी तत्काल सूचना दें। वरिष्ठ नागरिकों की सहूलियत के लिए पुलिस उनके पास जाकर समस्या सुनती है और समाधान कराती है। साइबर क्राइम से बचाव के लिए खुद की सतर्कता ही सबसे सशक्त उपाय है।
साइबर क्राइम एक्सपर्ट ने सुरक्षा के लिए बताए यह उपाय
साइबर क्राइम एक्सपर्ट विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों खासकर पेंशनर्स को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अकाउंट से संबंधित जानकारी को अपने तक सीमित रखें। क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड की राशि सीमा को जरूरत के अनुसार कम रखें और इसके लिए बैंक को प्रार्थना पत्र देकर पावती रसीद संभालकर रखें। ऑनलाइन बैंकिंग की आवश्यकता न हो तो बैंक को प्रार्थना पत्र देकर उसे बंद करा दें। यदि इंटरनेशनल बैंकिंग सुविधा की आवश्यकता हो तभी उसे एक्टीवेट कराएं। अन्यथा बैंक को प्रार्थना पत्र देकर सुविधा बंद करने को कहें। बैंक एकाउंट में यदि ज्यादा राशि है तो उसका फिक्स्ड डिपॉजिट कराना बेहतर होगा।
ऑनलाइन जालसाजी से बचाव के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान
- किसी अनजान व्यक्ति को मोबाइल न दें और न कॉल करने दें। मोबाइल को हमेशा लॉक रखें।
- यदि मरम्मत या सुधार के लिए मोबाइल सर्विस सेंटर में देते हैं तो उससे सिम जरूर निकाल लें।
- बैंक में जमा राशि फिक्स्ड डिपॉजिट कराने जैसी कॉल आए तो तत्काल सतर्क हो जाएं।
- ऑनलाइन बैंकिंग के लिए कभी भी सार्वजनिक कंप्यूटर का इस्तेमाल न करें।
- किसी भी लुभावने ऑफर या बंपर छूट की जानकारी कॉल कर दी जाए तो बहकावे में न आएं।
- पीएफ और ग्रेच्युटी से संबंधित जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- मोबाइल पर उपहार या ऑफर संबंधी आए किसी भी लिंक को कभी क्लिक न करें।
- सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स और इंटरनेट का इस्तेमाल सावधानी के साथ करें।
- ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम संबंधी पिन समय-समय पर चेक करते रहें।
- एटीएम रूम में सिर्फ वहां मौजूद सिक्योरिटी गार्ड से ही मदद लें।