डीसीपी क्राइम के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लोगों को पैसे का लालच देकर उनका खाता बैंकों में खुलवाया जाता है और इन खातों में क्रेडिट धनराशि का कुछ भाग खाताधारक को दिया जाता है।
खाता खुलवाने के बाद बैंक खातों की पूरी किट अपने पास रख लेते हैं। इसके बाद इन खातों में विदेशी साथी साइबर अपराधियों के साथ मिलकर डिजिटल अरेस्ट से संबंधित ठगी गई रकम मंगवाई जाती है। फिर इन पैसों को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करते हुए कैश निकाल लिया जाता है और अपने साथी विदेशी साइबर अपराधियों को इन पैसों के बदले अपना कमीशन काटते हुए डालर में पेमेंट कर दिया जाता है।
एडीसीपी साइबर क्राइम नीतू, एसीपी क्राइम विकास कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी नोएडा, लखनऊ आदि शहरों से पहले भी गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। इनके बारे में अन्य जानकारी जुटाई जा रही है।