जियो सिम, नोटबंदी के बाद यह तीसरा मौका, जब बड़ी संख्या में लोग कहीं कतारों में नजर आए तो कहीं मजमा लगाए। दो पहिया, चार पहिया वाहनों पर भारी छूट के बीच अपने-अपने सपनों में रंग भरने की हर किसी ने जीतोड़ कोशिशें कीं। सुबह शटर खुलने से पहले ही लोग वाहन शोरूमों पर जमा हो गए।
फिर शोरूमों के खुलने के बाद तो नजारा ऐसा था, मानो नवरात्र, धनतेरस और दीवाली सब एक साथ मन रही हो। पहले तो लोगों ने अपनी-अपनी पसंद तलाशी, बाद में जो कुछ भी मिला, लेते गए। डिस्काउंट आफर में वे गाड़ियां भी धड़ाधड़ बिक गईं, जिन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे थे। दोपहर 12 बजते-बजते बीएस-3 वाहनों का स्टॉक खत्म हो गया और अधिकतर डीलर, सब डीलर ने अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिरा दिए।
कई स्थानों पर स्थिति संभालने के लिए पुलिस लगानी पड़ी।
ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े लोगों के अनुमान के अनुसार शुक्रवार को जिले में दो पहिया और चार पहिया के कामर्शियल और निजी प्रयोग मिलाकर एक हजार से अधिक वाहनों की बिक्री हुई। कुछ घंटों में ही लगभग 10 करोड़ का कारोबार हुआ।
बीएस3 वाले वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद ऑटोमोबाइल कंपनियों की ओर से बंपर छूट के ऑफर ने त्योहारी सीजन के बाजार को भी पीछे छोड़ दिया। गुरुवार से शुरू हुई बीएस3 वाहनों की खरीदारी की होड़ ने शुक्रवार को और रफ्तार पकड़ी।
बंपर छूट पर मनपसंद वाहन की खरीदारी के लिए सुबह नौ बजे से पहले ही दो पहिया और चार पहिया वाहनों के शोरूमों पर कतार लगने लगी। शोरूमों के खुलने के बाद भीड़ पर काबू पाना वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों के लिए मुश्किल हो गया। फिर कई शोरूमों में पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी।
स्कूटी रेंज में आने वाले सभी तरह के मॉडल पलक झपकते बिक गए। फिर बाइक का स्टॉक भी घंटे भर में खत्म हो गया। ग्राहकों की कतार उसके बाद भी नहीं थमी। शोरूमों के बाहर मेले सा नजारा था। छूट के फेर में लोग शोरूमों से कम बिक्री वाली श्रेणी में शामिल बाइकें भी ले गए।
दोपहर 12 बजे तक गोदाम से इनका भी स्टॉक खत्म हो गया। फिर शोरूम संचालकों पर छूट वाले वाहन उपलब्ध कराने के लिए दबाव बनाने की खातिर लोग अपने संबंधों का इस्तेमाल करने में भी पीछे नहीं रहे।
स्थिति यह हो गई कि दोपहर में ही डीलर और सब डीलरों ने शोरूमों के शटर गिरा दिए। केवल वर्कशॉप खुली रही। बावजूद इसके लोग शाम तक शोरूमों के चक्कर काटते रहे।