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वर्चुअल हुआ बनारस घराने का सुर ताल, विश्व के कोने-कोने तक पहुंच रहा काशी के संगीत का प्रसाद

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कोरोना संक्रमण काल ने रवायत, रिवाज और परंपराओं को बदला है। बनारस घराने का सुर ताल और गुरु शिष्य परंपरा भी अब वर्चुअल हो चुकी है। विश्व के कोने-कोने तक काशी के संगीत का प्रसाद आभासी दुनिया के जरिए पहुंच रहा है।
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काशी के प्रख्यात सितारवादक पं. शिवनाथ मिश्र व पं. देवब्रत मिश्र की दिनचर्या अब पूरी तरह से बदल चुकी है। पहले जहां घर के गुरुकुल में शिष्यों की बैठक सजती थी वहीं अब कोरोना ने सबकुछ बदल दिया है। देश-विदेश से आने वाले शिष्यों की साधना सुबह से लेकर रात तक अनवरत जारी रहती थी लेकिन कोरोना संक्रमण काल में सब कुछ ऑनलाइन हो गया है। सुबह से शुरू होने वाली सितार की कक्षाएं देर रात तक आभासी दुनिया के मंच पर सजती हैं।
पं. देवब्रत मिश्र ने बताया कि काशी ने हमेशा दुनिया को ज्ञान, संगीत, कला और संस्कृति का उपहार ही दिया है। कोरोना संक्रमण काल से हम लोग निरंतर संगीत की ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। विश्व के कई देशों में संगीत साधक हमसे जुड़े हुए हैं और वह नियत समय पर संगीत की साधना को अनवरत जारी रखे हुए हैं। वैश्विक महामारी से जूझ रही दुनिया में लोग सबसे अधिक तनाव में हैं और संगीत ही वह माध्यम है जो तनाव को दूर भगाता है। न्यूजीलैंड, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड आदि देशों में कई शिष्य हैं जिनकी नौकरी जा चुकी है वह फीस भी नहीं दे सकते हैं। उनकी निशुल्क कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि शास्त्रीय संगीत की विरासत से हम किसी के जीवन में खुशी का प्रकाश ला सकें। रोजाना आठ से 10 घंटे की संगीत की क्लास चल रही है।
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परेशानी के बाद अब हो गई है आसानी
शास्त्रीय गायक पं. गणेश प्रसाद मिश्र का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण संगीत की शिक्षा का स्वरूप बदल गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्चुअल क्लास के जरिए गुरु शिष्य परंपरा को अनवरत जारी रखा गया है। शुरूआत में तो काफी परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन धीरे-धीरे अब बेहद आसान हो गया है। कथक नर्तक विशाल कृष्णा ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल से चली आ रही ऑनलाइन कक्षाएं अनवरत जारी हैं। नृत्य का ऑनलाइन प्रशिक्षण देना थोड़ा मुश्किल था लेकिन साधना से कुछ भी साधा जा सकता है।
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