आजादी के 77 साल बाद भी पूर्वांचल के आठ जिलों के करीब 17 हजार लोगों की जिंदगी रोशन नहीं हो पाई। शाम ढलते ही इन जिलों की 191 बस्तियों और मजराें में अंधियारा छा जाता है।
सबसे खराब स्थिति सोनभद्र जिले की है। यहां के 108 मजरों/ बस्तियों में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है, जबकि जिले के म्योरपुर ब्लाॅक में राज्य उत्पादन निगम की 2630 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली अनपरा परियोजना, सिंगराैली पावर प्लांट के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कई विद्युत परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, जहां से उत्पादित बिजली से देश-प्रदेश रोशन हो रहे हैं।
इसी तरह मिर्जापुर, बलिया, गाजीपुर, भदोही, मऊ, आजमगढ़, जाैनपुर में भी एक बड़ी आबादी तक बिजली की आपूर्ति नहीं हो पाई है। यहां पर विद्युतीकरण योजना के नाम पर करोड़ों रुपये फूंक दिए गए मगर बिजली के खंभों में आज तक करंट नहीं दाैड़ पाया।
सोलर लैंप और मोमबत्ती ही सहारा
सोनभद्र की 108 बस्तियों/मजरों में कहीं 50 तो कहीं 100 मकान बने हैं। एक अनुमान के मुताबिक, यहां पर करीब दस हजार से अधिक लोग रहते हैं। म्योरपुर ब्लॉक के 30, दुद्धी के 22, नगवां में 15, घोरावल में 17, रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक में 8, चोपन में 8, चतरा में 7, बभनी में 1 बस्ती/ मजरा विद्युतीकरण से वंचित हैं। दुद्धी ब्लॉक के खोखा, पगडेंवा गांव में ग्रामीण सोलर लैंप का इस्तेमाल करते हैं।
कारणवश सोलर बैटरी चार्ज नहीं हो पाती है, तब मोमबत्ती आदि का सहारा लेना पड़ता है। इसी तरह नगवां ब्लॉक के चेरुई, बांकी, मड़पा और म्योरपुर ब्लॉक में अनपरा के पहाड़ी क्षेत्रों वाले कुलडोमरी, रणहोर, जोगेंद्रा, मेड़रदह गांवों के कई मजरे बिजली की बाट जोह रहे हैं। विभाग का दावा है कि इन क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है।