दीनदयाल अस्पताल में लंबे समय से सीटी स्कैन मशीन खराब है। किसी तरह पीपीपी मॉडल पर सीटी स्कैन जांच कराई जा रही है। ट्रामा सेंटर में डिजिटल एक्सरे मशीन भी मेंटनेंस के अभाव में बंद पड़ी है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके सिंह के अनुसार रिमोट मंगाए जाने के साथ ही डेंटल ओपीडी में एक चिकित्सक की भी तैनाती की प्रक्रिया चल रही है, जिससे मरीजों को जांच में कोई दिक्कत न हो।
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में पांच साल से शो पीस बनी है एनालाइजर मशीन
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा की पैथालॉजी में खून के साथ ही शुगर, लीवर फंक्शन टेस्ट, शुगर आदि की जांच के लिए हर दिन मरीजों की भीड़ लगी रहती है। मरीजों की सहूलियत के लिए यहां टोकन सिस्टम की व्यवस्था भी है लेकिन यहां मशीन की कमी की वजह से जांच प्रभावित हो रही है।
मरीजों को खून की जांच की बेहतर रिपोर्ट मिल सके, इसके लिए यहां नवंबर 2017 में ही एनालाइजर हेमेटोलॉजी मशीन 5 पैरा (आधुनिक तकनीक की मशीन) मंगवाई गई थी। लैब में आने के बाद कुछ दिन तक ही जांच हुई इसके बाद से मशीन पर जांच नहीं हो रही है। इससे जुड़ा एक उपकरण नहीं आने की वजह से जांच का संकट बना है। यह ऐसी मशीन है, जिस पर खून जांच की रिपोर्ट अन्य मशीनों से बेहतर आती है।
मंडलीय अस्पताल के एक्सरे, अल्ट्रासाउंड केंद्र पर आने वाले मरीजों को जांच और रिपोर्ट मिलाकर करीब एक घंटे तक का इंतजार करना पड़ता है। दरअसल यहां मशीनें तो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के दो स्वीकृत पदों में से केवल एक ही है। इससे काम प्रभावित होता है। एक्सरे कक्ष में दो एक्सरे मशीनें भी हैं लेकिन उन्हें चलाने वालों की कमी है। आम तौर पर एक ही कर्मचारी यहां एक्सरे करता नजर आता है।
इसी कक्ष में ढेर सारी मशीनें और उपकरण एक चादर से ढ़ककर रखी गई हैं। अस्पताल के एसआईसी डॉ. हरिचरण सिंह के अनुसार पैथालॉजी एनालाइजर मशीन के न चलने की कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो उसे चलवाने की दिशा में हर संभव प्रयास किया जाएगा। एक्सरे केंद्र पर उपकरणों के रखे जाने की बात है तो कुछ मशीनें बेकार हो गई हैं। उनहें नियमानुसार निष्प्रयोज्य मानते हुए रखवाया गया है।
शिवप्रसाद गुप्त मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा।
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जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा में हर दिन ओपीडी में 300 से 400 गर्भवती महिलाएं आती हैं। इसके अलावा यहां 100 से अधिक महिलाएं वार्डों में भी भर्ती हैं। हालत यह है कि यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ अगर किसी गर्भवती महिला को खून की जांच लिख रही हैं तो जांच नहीं हो पाती है। अस्पताल में पैथालॉजी लैब भी है, वहां जरूरी स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, जांच की मशीन भी है लेकिन खून की जांच करने के लिए मशीन में जरूरी केमिकल ही खत्म हो गया है।
करीब एक सप्ताह से इस तरह की समस्या बनी हुई है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी बायोकेमिस्ट्री (एलएफटी, केएफटी, शुगर, एसजीपीटी, एसजीओटी, किडनी संबंधी जांच, यूरिया)की जांच नहीं हो पा रही है। केमिकल कब तक आ जाएगा, महिलाओं, उनके परिजनों के सवाल के पूछने पर लैब के कर्मचारी भी कोई सटीक जवाब नहीं दे पाते हैं।
महिला अस्पताल में मरीजों को एक ही जगह स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मिल सके, इसके लिए नेशनल हेल्थ पोर्टल से लिंक करते हुए एक स्क्रीन भी लगवाया गया है। वह भी केवल शोपीस ही बना है। लंबे समय से यह चल नही रहा है। अस्पताल के एसआईसी डॉ.एके श्रीवास्तव ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर केमिकल भी मंगा लिया जाएगा, जिससे कि महिलाओं कल जांच में कोई समस्या न रहे।