पूर्वांचल में पिछले एक दशक के अपराध का पन्ना पलटे तो वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर और चंदौली समेत पूर्वांचल में अजय विजय का अलग ही खौफ रहा है। सुपारी लेकर हत्या और रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात अजय विजय से सराफा व्यवसायी, ठेकेदार और चिकित्सक काफी खौफ खाते थे। नाम सुनकर ही लोग रंगदारी पहुंचा देते थे।
चिकित्सक डीपी सिंह की हत्या से ही अपराध जगत में अजय विजय का नाम पूर्वांचल से बोलने लगा था। 20 साल की उम्र में पहली हत्या अजय ने की। पश्चिम और बिहार में भी अजय विजय सुपारी लेकर हत्या, अपहरण जैसे वारदात को अंजाम देता रहा है। 2022 में गुपचुप तरीके से चंदौली में सरेंडर करने वाला अजय विजय जमानत पर छूटा तो फिर कभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका।
चंदौली एसओजी ने भी दवा व्यवसायी रोहितास पाल हत्या कांड में अजय विजय से पूछताछ की है, लेकिन कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिल सका है। 2013 में 50 हजार के इनामी अजय विजय को कैंट पुलिस ने एक चिकित्सक से रंगदारी वसूलने के फिराक में पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था। वाराणसी और बांदा जेल में बंद रहते हुए अजय विजय ने पूर्वांचल में नए लड़कों का एक अलग गैंग तैयार किया था, जिनका काम रंगदारी वसूलना था।
माशूका के साथ किराये पर रहता था
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अजय विजय को पकड़ना आसान नहीं था। वह 15 दिनों से सारनाथ थाना क्षेत्र में सक्रिय था। कमिश्नरेट एअसोजी को भनक तक नहीं लग सकी। माशूका के साथ वह किराये के मकान में रहता था। गाजीपुर को अपना मूल ठिकाना बनाए अजय विजय की लोकेशन सारनाथ में मिलते ही पुलिस ने उसे दबोच लिया।