बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल परिसर में गुरुवार को लंका थानाध्यक्ष के मना करने के बावजूद प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को लाठियों से पीटा। बवाल की जानकारी पाकर रुइया चौराहे पहुंचे एसएसपी नितिन तिवारी को इसकी जानकारी हुई तो वह तल्ख हो उठे। कड़े लहजे में उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से पूछा कि आप सबको लाठी मारने का अधिकार किसने दिया। सुरक्षा कर्मियों के पुलिस की तरह की खाकी वर्दी पहने होने पर भी एसएसपी ने फटकार लगाई। एसएसपी के कड़े रुख पर सुरक्षाकर्मियों की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई। सभी माफी मांगने लगे लेकिन एसएसपी ने कहा कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई होगी। शांति और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले चाहे जो हों, बख्शा नहीं जाएगा।
दरअसल, मारपीट और पथराव के बाद रुइया चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत कर एसएसपी उन्हें समझाने में जुटे थे। सुरक्षा कर्मियों की मनमानी की छात्रों ने कई शिकायतें कीं। एसएसपी ने उन्हें कॅरियर पर ध्यान देने और किसी भी तरह की दिक्कत पर पुलिस की मदद लेने, कानून हाथ में न लेने की ताकीद की। इसी बीच, यह बात सामने आई कि विवाद की शुरुआत के वक्त ही मौके पर पहुंचे लंका थानाध्यक्ष ने सुरक्षा कर्मियों से लाठी न चलाने और विवाद शांत कराने के लिए बीचबचाव किया था लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उनकी एक नहीं सुनी। इस पर तल्ख हुए एसएसपी ने सुरक्षा कर्मियों को जमकर फटकार लगाई। दो टूक कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह भी ताकीद की कि पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स या सेना के जवान जिस रंग और तरीके की वर्दी पहनते हैं, उस तरह की वर्दी निजी सिक्योरिटी एजेंसियों के गार्ड्स नहीं पहन सकते हैं। बताया कि बीएचयू के कुलपति को पत्र भेजा जा रहा है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों की वर्दी का कलर और स्टार, बैज इत्यादि लगाने का तरीका तत्काल प्रभाव से बदला जाए। एसएसपी ने सीओ भेलूपुर से बीएचयू परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षाकर्मियों व छात्रों के बीच आए दिन हो रही मारपीट के कारणों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।