पिछले सप्ताह वाराणसी के आकाश में एक भीषण हादसा होते-होते बचा। गत रविवार को बाबतपुर एयरपोर्ट के पास दो व्यवसायिक विमान मात्र नौ किलोमीटर दूर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए थे।
मात्र 15 सेकेंड में दोनों के बीच टक्कर हो जाती लेकिन आधुनिक तकनीक ने हादसा होने से बचा लिया। इससे सैंकडों यात्रियों की जान बच गई। बाबतपुर एयरपोर्ट के डायरेक्टर एके राय ने बताया कि पायलटों की लापरवाही के वजह से यह हादसा होने से बचा।
उन्होंने बताया कि एयरएशिया और इंडिगो के विमान वाराणसी के आसमान में उड़ रहे थे। एयरएशिया का एयरबस 320 विमान I5 768 बागडोगरा से दिल्ली जा रहा था, जबकि इंडिगो के प्लेन 6E 398 ने दिल्ली से बागडोगरा के लिए उड़ान भरी थी।
इस दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल की ओर से एयरएशिया के पायलटों को निर्देश दिया गया कि वे विमान को थोड़ा नीचे लाते हुए 34,000 फीट की उंचाई पर रहें। पायलटों ने एटीसी को जवाब दिया कि उन्हें संदेश मिल गया और वे उसे समझ भी गए हैं।
वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक एयरएशिया के पायलटों ने विमान को निर्धारित स्तर 34,000 फीट से नीचे ले जाना जारी रखा। इसके फलस्वरुप एयरएशिया का विमान 33,000 फीट के स्तर पर आ गया।
इसी उंचाई पर इंडिगो का विमान पहले से उड़ रहा था। एक दूसरे की ओर आते हुए दोनों विमान मात्र नौ किलोमीटर दूर थे। दोनों के बीच टक्कर होने में महज 15 सेकंड का फासला था। ऐसे वक्त में वह मॉर्डन तकनीक काम आई जो हवा में दो विमानों की आमने-सामने की टक्कर को रोक देती है।
इन दिनों विमानों में एयरबोर्न कलिजन अवॉइडेंस सिस्टम लगा होता है जो ऐसे संभावित टक्कर को रोकने का काम करता है। इस घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं।