वीडीए पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए सोमवार की सुबह साढ़े दस बजे कमिश्नरी कंपाउंड में एक युवक ने आत्मदाह का प्रयास किया। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद लोग सकते में आ गए।
कमिश्नर ने पुलिस को बुलवाकर उसे दीनदयाल अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां से डाक्टरों ने उसे बीएचयू रेफ र कर दिया। इस बीच कमिश्नर ने घटना की मजिस्ट्रेटियल जांच एडीएम सिटी से कराने के साथ ही वीडीए उपाध्यक्ष से इस मामले में जवाब तलब किया है।
पुलिस के अनुसार आत्मदाह की कोशिश करने वाला शख्स आभूषण कारोबारी मनीष अग्रवाल (38) है, जो कोतवाली थाना क्षेत्र के राजमंदिर मोहल्ले का रहने वाला है।
उधर, देर रात मनीष के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मुकदमा कैंट थाना में दर्ज कर लिया गया है।
बता दें कि वीडीए की ओर से मकान ध्वस्तीकरण की लगातार मिल रही धमकी से आजिज आकर मनीष सुबह कमिश्नर से शिकायत करने उनके कार्यालय अकेले ही पहुंचा था।
बताया जाता है कि गंगा के दो सौ मीटर के दायरे में मकान आने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर 2009, 2011 और 2014 में मनीष पर वीडीए का हथौड़ा चल चुका है।
उसके बाद भी वीडीए के अधिकारी मकान गिराने की लगातार धमकी दे रहे थे। बहरहाल, मनीष ने अधिवक्ता चेंबर के कक्ष संख्या आठ के सामने सीढ़ी के पास खुद के ऊपर पेट्रोल उड़ेला।
पेट्रोल वह पॉलीथिन में छिपाकर बोतल में लेकर आया था। अधिवक्ता भवन के सामने आकर उसने खुद पर आग लगाई और लपटों से घिरकर दौड़ते हुए आयुक्त सभागार के सामने जाकर गिर गया।
यह देख वहां इंटरलॉकिंग का काम कर रहे मजदूरों के साथ कुछ अधिवक्ताओं ने वहां पड़ा बालू और शॉल डालकर किसी तरह आग बुझाई।
घटना के तत्काल बाद मौके पर पहुंचे मनीष के जीजा रूपेश अग्रवाल ने कहा कि उनके साले ने वीडीए की प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर आत्मदाह का प्रयास किया है।
मनीष वीडीए के अधिकारियों की शिकायत करने कमिश्नर के यहां आए थे। बताया कि वीडीए नोटिस तो जारी नहीं कर रहा था मगर उनका मकान गिराने की लगातार धमकी अधिकारियों की ओर से दी जा रही थी।