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ट्रेन में नहीं मिला इलाज, यात्री की मौत

Fri, 01 Jul 2016 02:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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बेसुध हाल में मृतक की बेटी पल्लवी।
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एक तरफ रेल मंत्री सुरेश प्रभु बच्चों के लिए ट्रेन रोककर दूध की व्यवस्था तक करा रहे हैं, वहीं उनके विभाग के अधिकारियों पर इसका कोई असर नही है। वे हद दर्जे की संवेदनहीनता दिखा रहे हैं।  फरक्का एक्सप्रेस में गुरुवार को एक यात्री इसी संवेदनहीनता की भेंट चढ़ गया।
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 भागलपुर निवासी डीपी सिंह (57) अपनी 17 वर्षीय बेटी पल्लवी के साथ फरक्का एक्सप्रेस से दिल्ली से घर जा रहे थे। सुलतानपुर के आगे स्थित कृष्णानगर हाल्ट के समीप सिंह को उल्टियां होने लगीं।  सरकोनी स्टेशन तक पहुंचते-पहुंचते कंडक्टर हरिशंकर तिवारी को सूचना दी गई, जिन्होंने इस बारे में कंट्रोल को अवगत कराया। कंट्रोल की सूचना पर कैंट रेलवे स्टेशन पर डॉक्टर एंबुलेंस के साथ पहुंच गए और सिंह का इंतजार करने लगे लेकिन संदेश और सूचना के बावजूद ट्रेन यार्ड में ही रोक दी गई। डॉक्टरों ने भी यार्ड तक जाने की जहमत नहीं उठाई। आधे घंटे तक ट्रेन यार्ड में ही रुकी रही। इसी बीच यार्ड में ही सिंह की मौत हो गई।


 जब ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंची तो यात्रियों ने लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए विरोध किया। यात्रियों, जीआरपी और आरपीएफ के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। यात्रियों का कहना था कि जब यह पता था कि ट्रेन में एक यात्री बीमार है, तो उसे प्लेटफार्म पर जल्दी क्यों नही लिया गया? कुछ ही दूर यार्ड में ही चिकित्सकीय सुविधा क्यों नही मुहैया कराई गई?  इस बारे में चीफ ट्रैफिक मैनेजर रवि प्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि पहले से सभी प्लेटफार्म ब्लाक थे। बावजूद इसके ट्रेन को प्लेटफार्म पर जल्द से जल्द लेने की पूरी कोशिश की गई।
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मृतक डीपी सिंह की बेटी पल्लवी को स्टेशन पर आरपीएफ की महिला कांस्टेबल की निगरानी में रिटायरिंग रूम में ठहराया गया है। रो-रोकर उसका बुरा हाल है। परिवार के अन्य सदस्यों के शुक्रवार सुबह आने की संभावना है। शव के पोस्टमार्टम के बाद ही डीपी सिंह का मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा।
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