जल्द सूचीबद्ध होगा फैजान गैंग, अधिकतर सदस्य 17 से 25 साल के
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लंबी मशक्कत के बाद डकैती की वारदात का खुलासा करने वाली पुलिस के हाथ कई ऐसे तथ्य आए हैं, जो चौंकाने वाले हैं। चार दिन की ताबड़तोड़ छापेमारी और सुरागकशी में पता चला है कि दो साल पहले मुठभेड़ में मारे गए सनी सिंह के गुर्गों ने जिला जेल में निरुद्ध संतोष शुक्ला और शाहरुख के गैंग से हाथ मिला लिया है।
नई उमर की इसी गैंग ने डकैती की वारदात को अंजाम दिया। डकैती का मास्टर माइंड फैजान इनका अगुवा है। संतोष और शाहरुख के इशारे पर उसने ही चौक और दालमंडी इलाके में नई उमर के लड़कों की गैंग खड़ी की है। इसके लिए अधिकतर सदस्य 17 से 25 साल के बीच के हैं।
दो साल पहले एसटीएफ ने बदमाश सनी सिंह को मार गिराया था। उसके बाद उसकी गैंग टूट गई थी। उसके गुर्गों में अधिकतर ने या तो रास्ता बदल लिया था या फिर शहर छोड़ दिया था। लेकिन अब पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि उसके गुर्गे जिला जेल में निरुद्ध बदमाश संतोष शुक्ला और शाहरुख की गैंग के संपर्क में आ गए हैं।
फैजान की मदद से गैंग में दालमंडी और चौक क्षेत्र के कम उम्र के लड़कों को शामिल कर शहर में और आसपास के इलाकों में लूट, रंगदारी जैसी वारदातें की जा रही हैं। चर्चित शेखू हत्याकांड के अलावा हत्या के प्रयास, रंगदारी, आर्म्स एक्ट सहित कई अन्य गंभीर आपराधिक वारदातों में आरोपी फैजान, अमन और सलमान पहले सनी सिंह के करीबी हुआ करते थे।
क्राइम ब्रांच की मानें तो चौक और दालमंडी क्षेत्र में सक्रिय गैंग में 30 से ज्यादा बेहद कम उम्र के लड़के हैं। एसएसपी नितिन तिवारी ने बताया कि फैजान की गैंग को सूचीबद्ध किया जाएगा। उसकी गैंग के चिह्नित सभी बदमाश अभियान चलाकर जेल भेजे जाएंगे।
तकनीक की भी जानकारी
एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की तफ्तीश में सामने आया कि फैजान की गैंग में काम करने वाले लड़के तकनीकी तौर पर बेहद जानकार हैं। ठठेरी बाजार में बदमाशों ने साक्ष्य मिटाने के लिए सीसीटीवी कैमरे के साथ ही उसके डीवीआर को तोड़ डाला। वारदात के बाद सभी ने तत्काल मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया और फिर उसे ऑन नहीं किया। वारदात के दौरान इस्तेमाल किए गए मोबाइल में दूसरा सिम भी नहीं लगाया।
एक दिन पहले भी दूकान पर गया था फैजान
डकैती में बरामद सामान।
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डकैती की वारदात का मास्टर माइंड चौक क्षेत्र की कचौड़ी गली निवासी फैजान अपने दो साथियों के साथ डकैती के एक दिन पहले भी सर्राफ संजय अग्रवाल की दूकान पर गया था। कुछ देर तक तीनों ने जेवर देखने के बहाने दूकान की रेकी की थी। वारदात के दिन सभी बदमाश पहले फैजान के घर जुटे।
वहां पूरी प्लानिंग हुई। फिर सब अलग-अलग होकर ठठेरी बाजार मोड़ स्थित संजय की दूकान के पास पहुंचे। सबसे पहले पप्पू नाटे और अलताफ संजय की दूकान में जेवर देखने के बहाने घुसे। उसके कुछ देर बाद शिवम, मनोज मामा सहित चार अन्य बदमाश वहां पहुंच गए। जबकि उन्हें कवर करने के लिए फैजान और उसके बाकी साथी गली में थे।
जेवर समेटने के बाद जब पप्पू, अलताफ, शिवम, मनोज सहित अन्य बदमाश नीचे उतरे तो पहले से तय प्लान के अनुसार गोविंदपुरा की गली की तरफ बढ़ गए। उनके निकलने के बाद फैजान और बाकी साथी भी गोविंदपुरा की गली में घुसने के बाद अलग-अलग रास्तों से दालमंडी पहुंचे।
वहां फैजान के घर की छत पर लूटे गए जेवरात का बंटवारा हुआ। फिर सभी अलग-अलग भाग निकले। पुलिस के अनुसार, एक बदमाश के हिस्से ढाई सौ से तीन सौ ग्राम जेवरात आया था। पकड़े गए शिवम ने अपने हिस्से के जेवरात अपने मां-बाप को छिपाने के लिए दिए थे। जिस सर्राफ के इशारे पर संजय अग्रवाल की दूकान में डकैती की योजना बनी, अब पुलिस उसे चिह्नित करने में जुटी है।
पुलिस के मुताबिक, इसी सर्राफ ने बदमाशों को सूचनाएं मुहैया कराई थी। इसके लिए पुलिस ने संजय से भी उनके यहां से जेवरात खरीदने वालों की सूची मांगी है।