फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: शिक्षक एमएलसी चुनाव में लाल बिहारी की बड़ी जीत, भाजपा प्रत्याशी को 4898 मतों से हराया; नारेबाजी

Wed, 28 Oct 2026 06:43 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना में पहले चक्र में सपा के लाल बिहारी यादव को 10,958 मत मिले, जबकि भाजपा के प्रमोद कुमार को 6,060 मत प्राप्त हुए। लाल बिहारी यादव ने 4,898 मतों की बढ़त बना ली। बढ़त के बाद उनकी जीत के बाद समर्थकों में उत्साह है। लाल बिहारी माला पहनकर घूमते नजर आए। डीएम ने उन्हें प्रमाण-पत्र भी साैंपा है।
विज्ञापन
सपा समर्थकों में जश्न। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने बड़ी जीत दर्ज की है। मतगणना में उन्होंने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 4898 मतों के अंतर से हराया। लाल बिहारी यादव को कुल 10958 मत मिले, जबकि डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा के पक्ष में 6060 मत पड़े। बढ़त के बाद लाल बिहारी यादव माला पहनकर मतगणना स्थल पर घूमते नजर आए। उनकी जीत से सपा समर्थकों में उत्साह रहा।

विज्ञापन




शिक्षक एमएलसी सीट पर प्रथम अधिमान के मतों की गणना पूरी होने के बाद जारी विवरण पत्र में लाल बिहारी यादव की बढ़त सामने आई। इस सीट पर कुल 22943 वैध मत मिले, जबकि 1441 मत निरस्त किए गए। दोनों प्रमुख प्रत्याशियों के बीच मतों का अंतर 4898 रहा।

विज्ञापन
Trending Videos

कार्यकर्ताओं में जश्न

माला पहनकर घूमते लाल बिहारी। - फोटो : अमर उजाला
अन्य प्रत्याशियों में डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह को 3111, धर्मेंद्र कुमार यादव को 1088, सुधांशु शेखर त्रिपाठी को 533, चेतनारायण दुबे को 450, संजय राय निष्पक्ष को 301, डॉ. कपिल अस्थाना को 152, अक्षय सिंह और देव नारायण सिंह को 108-108 मत मिले।

मतगणना के पहले चक्र में लाल बिहारी यादव को 6941 और भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 3005 मत मिले थे। दूसरे चक्र में लाल बिहारी यादव को 4017, जबकि प्रमोद कुमार मिश्रा को 3055 मत प्राप्त हुए। दोनों चक्रों के मत जोड़ने पर सपा प्रत्याशी की बढ़त 4898 मतों की रही।

लाल बिहारी यादव ने पिछली बार भी शिक्षक एमएलसी चुनाव में जीत दर्ज की थी। उस समय उनकी जीत का अंतर 960 मत था। इस बार उन्होंने जीत का अंतर बढ़ाकर 4898 मत कर लिया। वहीं, वाराणसी खंड स्नातक एमएलसी सीट पर मतपत्रों की बंडलिंग और मतगणना का काम देर रात तक जारी रहा।

बिहारी लाल को प्रमाण-पत्र साैंपते कमिश्नर एस. राललिंगम। - फोटो : संवाद
कब गिने जाते हैं दूसरी वरीयता के वोट 
विधान परिषद चुनाव में मतदान के समय मतदाता उम्मीदवारों के नाम के सामने अपनी पसंद के अनुसार 1, 2, 3 अंक लिखते हैं। '1' उनकी पहली पसंद (फर्स्ट प्रेफरेंस) होती है, '2' दूसरी पसंद, और '3' तीसरी पसंद होती है।

सबसे पहले केवल पहली वरीयता (फर्स्ट प्रेफरेंस यानी '1') के वैध वोटों की गिनती होती है। चुनाव जीतने के लिए एक निश्चित कोटा (कुल वैध मतों का आधा हिस्सा + 1) हासिल करना जरूरी होता है। अगर पहली गिनती में ही किसी उम्मीदवार को जीत का निर्धारित कोटा मिल जाता है, तो वह तुरंत जीत जाता है।

अगर कोई भी उम्मीदवार पहली पसंद के वोटों से आवश्यक कोटा पूरा नहीं कर पाता है, तब दूसरी और अगली वरीयता के वोटों की गिनती शुरू होती है। ऐसी स्थिति में पहली वरीयता के सबसे कम वोट माने वाले उम्मीदवार को रेस से बाहर कर दिया जाता है।
विज्ञापन

इसके बाद बाहर किए गए उम्मीदवार के मतपत्रों को निकाला जाता है और यह देखा जाता है कि उन बैलेट पेपरों पर दूसरी वरीयता (2 नंबर) किस अन्य उम्मीदवार को दी गई है। उन मतपत्रों को उनकी दूसरी पसंद के आधार पर संबंधित उम्मीदवारों के खातों में ट्रांसफर (स्थानांतरित) कर दिया जाता है। 

यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक कि कोई उम्मीदवार जरूरी कोटा पार करके जीत हासिल नहीं कर लेता। यही कारण है कि एमएलसी चुनाव में कई बार पहली पसंद में आगे रहने वाला उम्मीदवार भी हार सकता है, अगर उसके पक्ष में दूसरी या अगली वरीयता के पर्याप्त वोट ट्रांसफर न हों।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें