यूपी के सोनभद्र में करीब दो सौ बीघा वन भूमि कब्जाने के मामले में बुधवार को पुलिस ने बसपा के पूर्व मंत्री कैलाशनाथ सिंह यादव और उनके पुत्र एवं बसपा के पूर्व विधायक सुनील सिंह यादव पर एफआईआर दर्ज कर ली।
यह कार्रवाई जोगेंद्रा सेक्सन के वन दरोगा रफीक अहमद की तहरीर पर की गई। दो वर्ष पूर्व सूबे के तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक भू-अभिलेख एवं वन बंदोबस्त एके जैन ने योगेंद्रा में एक राजनेता द्वारा दो सौ बीघे से अधिक जमीन कब्जाने की रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
इसके एक माह बाद ही उनका तबादला कर दिया गया था पर मामला सुर्खियों में बना रहा। बाद में एनजीटी ने धारा चार की जमीनों की जांच का आदेश दिया गया तो एक बार फिर से इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई। तहरीर के मुताबिक पिछले माह प्रशासन और वन महकमे की टीम की मौजूदगी में जमीन की नापी कराई गई।
इसमें दो सौ बीघे जमीन पर कब्जे की पुष्टि हुई। इसके बाद तीन जुलाई को दुद्धी में ‘एंटी भू माफिया समिति’ की बैठक हुई। इसमें एसडीओ रेणुकूट आनंद वर्मा की तरफ से मामला उठाया गया, जिस पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया। सात जुलाई को एसडीएम दुद्धी भानु प्रताप सिंह ने डीएफओ को एफआईआर एवं अन्य कार्रवाई का निर्देश दिया।
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इस पर सूबे के पूर्व मंत्री कैलाशनाथ यादव और उनके बेटे एवं ओबरा के पूर्व विधायक सुनील कुमार सिंह के खिलाफ बुधवार को प्राथमिकी दर्ज करा दी गई। एसपी आरपी सिंह ने कहा कि मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है।
इस बारे में पूर्व मंत्री कैलाशनाथ सिंह यादव ने कहा कि उन पर और उनके पुत्र के खिलाफ यह पूरी कार्रवाई राजनीति के तहत की गई है। जिस वन भूमि पर कब्जे के आरोप में उन पर एफआईआर हुई है, उसमें कई लोगों की जमीनें हैं।
उनके नाम कुछ ज्यादा ही जमीन नाप दी गई है। उस एरिया में एक तालाब भी है, जिसे मैने नहीं खुदवाया है पर तालाब की जमीन पर भी हमारा ही कब्जा बता दिया गया है। जिस एरिया में कब्जा है, उसका मामला पहले से कोर्ट में है।